Ye Raasta Mujhe Jaanta Hai: A Hindi Kavita

A Hindi Poem, Ye Raasta Mujhe Jaanta Hai, “ये रास्ता मुझे जानता है” is from my childhood memories when, we used to go our village on these narrow footpaths. Now nobody use them as roads have reached there. Actually, we all are busy to reach somewhere. But where none doesn’t know. These pagdandiyan or Kachhe Raaste, tell the same thing. At least know where you are heading toward. The web of roads are now spread to the Pahad that is a symbol of development. But Pahad questions if you are happy now with the development. If no, what is the meaning of development then.  So, it has to say something via the Hindi poem. You can also listen it in my voice in PahadNama my YouTube channel. To Watch video, visit PahadNama.

Ye Raasta Mujhe Jaanta Hai : A Hindi Poem

 

ये रास्ता मुझे जानता है मुझको पहचानता है।
सड़कों से मुलाकात तो आज की है पर

इन पगडण्डियो में मेरा बचपन महकता है ।

ये रास्ता मुझे जानता है, मुझको पहचानता है।

रुखी थी पगडण्डिया कि इन पर कोई चलता नहीं
दिन बार त्योहार गुजरे पर इन से कोई मिलता नहीं।

अब यहां बेशर्म बिन कपड़ों की सड़क है
सिर पर छांव के लिए एक पेड़ तक मिलता नहीं।

ये रास्ता मुझे जानता है, मुझको पहचानता है।

सडक पर मादक वाहन सवार है
थककर सुकुन में कोई बैठता नहीं

हर किसी को कहीं न कहीं पहुंचने की जल्दी है,

चलने का मजा अब कोई लेता नहीं।

रूठ कर उगा ली है इन पगडण्डियो ने झाड़ियों की फसल
समझदार हो गये है मुसाफ़िर कि अब कोई भटकता नहीं

खुश हो कर मिली पगडण्डिया मुझसे कुछ ऐसे

कि पहली बार अब इस बेबाकी से कोई मिलता नहीं

 

मिले यहां कुर्रे लिपट कर मेरे कपड़ों से जैसे

अब कोई बिछड़ा दोस्त मिलता नहीं

ये रास्ता मुझे जानता है मुझको पहचानता है।

Check out other Hindi Poems here. 

Previous Post Next Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *