Why Do I Smoke: A Hindi Poem

Why do I Smoke

Smoke is a just a Hindi Poem. Maybe you don’t relate with it but it is what I felt a long time ago and looked for the pen and paper to write it but I got Kagaj Kalam to express. Enjoy the piece. Here are some of the other interesting Hindi poems waiting for your read.

Why Do I Smoke : A Hindi Poem

हमे फेफड़े जलाने का कुछ खासा शौक नहीं,

बस तेरे करीब रहने के लिए सिगरेट पीया करते हैं, 

सिगरेट कभी शेयर करना हमारी मजबूरी नहीं,

बस तेरी अँगुलियों को छूने  का बहाना ढूंढा करते हैं।

 

       ” मालुम न था तेरी ये छुअन कुछ ऐसा स्पार्क कर देगी

              सिगरेट सुलगाने के साथ, दिल भी मेरा जगमगा देगी।

           यकीन नहीं बातों में मेरी तो ,

                आँखों में जरा गौर फरमाये इनकी तपिश तुम्हरी नजरें न झुकाएं ,

      तो दिलफ़ेंकी का कोई और बहाना आजमायें। “

 

सिगरेट पूरी न पी पायें, ऐसी तो उसमें कोई बात नहीं,

बस तेरे लबों के बाद, उसे चुमने का बहाना ढूंढा करते हैं,

तभी तो जब भी बुलाये तू टपरी पर हम दौड़े चले आतें हैं।

 

ऐसा नहीं कि मशरूफियत हमारी कम  नहीं,

बस तेरे साथ कुछ लम्हा और बिताने का बहाना ढूंढा करते हैं।

 

 “लम्हा जो किस्सा बन जाये, मेरी कहानी का नायाब हिस्सा बन जाये। “

 

                         “तेरे बनाये ये नियम, लम्हें संजोएं ये नियम,  

छल्ले बनाने के, कश लगाने के, 

 सिगरेट बढ़ाने के ये नियम,

                          कुछ किस्से बयान करते ये नियम,

मेरी कहानी गढ़ते ये नियम। “

 

वैसे तो किसी नियम के दायरे में खुद को समेटने वाले हम नहीं,

पर तेरे इन बचकाने नियमों के बन्धन में बंधने का बहाना ढूंढा करते हैं।

 

हमे फेफड़े जलाने का कुछ खासा शौक नहीं,

बस तेरे करीब रहने के लिए सिगरेट पीया करते हैं।

Why Do I Smoke is a Hindi poem, if you fall in love with someone who shares smoking with you, let us know via comments. If you have your version of it don’t hesitate to share with us believe me you will fall in love with kagajkalam if you share. To watch and listen a wide range of Hindi poems click here. 

 

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