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Understanding: समझ को समझने की समझ मैं लाऊँ कहाँ से

Understanding: समझ

Understanding: समझ is a Hindi Poem on Kagaj Kalam. Many people claim to have it but this is their misconception. समझ is never ending approach. Once you stop to improve yourself, developing समझ stops there. Many of us have seen the pot making but only potter knows how to shape it for stronger. He keeps the touch in a particular way that resists extra or less pressure.

There is the thin line between everything which can destroy or build the things. That thin line is basically understanding or समझ. That is why everyone can’t get it right. In the Hindi poem, I managed to comprehense these words.

Kagaj Kalam Hindi Poems

Understanding: समझ A Hindi Poem 

PahadNama For Watch. Here you will watch some of the recitation of my Hindi poems.

समझ को समझने की समझ मैं लाऊँ कहाँ से,

घड़े को तो बनते हुए देखा है सभी ने

हाथों में वो सख्ती  वो नरमी  मैं लाऊँ कहाँ से,


ये जरूरत की चीज़ें दुकानों में बिकती कहाँ है

न  किताबों में, न पैसों में तो ये मिलती कहाँ है।


अगर गुनगुने पानी की गर्माहट और ठंडक अलग- अलग मापनी आ जाये

तो इस समझ को समझने की थोड़ी समझ मुझमे आ जाये।



ये समझ है, हर कोई इसके होने का दावा करता है

और अपनी ही समझ से समझदार खुद को घोषित करता है।


ये समझ जो समझनी इतनी आसान होती तो ऊपर लिखी पंक्तियाँ कुछ तो समझमे आती

चलो छोड़ो ये समझदारी की बातें, बताओ समझ को समझने की समझ मैं लाऊँ कहाँ से।

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