Understanding: समझ

Understanding
Understanding

समझ को समझने की समझ मैं लाऊँ कहाँ से,

घड़े को तो बनते हुए देखा है सभी ने

हाथों में वो सख्ती  वो नरमी  मैं लाऊँ कहाँ से,

 

ये जरूरत की चीज़ें दुकानों में बिकती कहाँ है

न  किताबों में, न पैसों में तो ये मिलती कहाँ है।

 

अगर गुनगुने पानी की गर्माहट और ठंडक अलग- अलग मापनी आ जाये

तो इस समझ को समझने की थोड़ी समझ मुझमे आ जाये।

 

ये समझ है, हर कोई इसके होने का दावा करता है

और अपनी ही समझ से समझदार खुद को घोषित करता है।

 

ये समझ जो समझनी इतनी आसान होती तो ऊपर लिखी पंक्तियाँ कुछ तो समझमे आती

चलो छोड़ो ये समझदारी की बातें, बताओ समझ को समझने की समझ मैं लाऊँ कहाँ से।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *