The War: Stand for the truth

War can’t be justified. No stone should be left unturned to prevent the devastation. The one who knows the consequences of war yet is in favor of war with responsibility. It means he wants something on any price. Now anyone who has no responsibility is saying about peace and Buddha’s teaching, these all are the easy way out from responsibility. War doesn’t have a literal meaning. War is personified here anything which appeals you to stand up and fight.

युद्ध जो विशुद्ध है 

फिर बुध का प्रबुद्ध छोड़ 

रण से तू कभी न मुख मोड़ना। 

 

शंखनाद है बजा, प्राण हथेली में सजा 

पर पीठ दिखाके तू कभी न भागना। 

 

गाण्डीव उठा, त्रिशूल उठा,

अब मृत्यु से परदा उठा 

पर आज यहाँ कोई न कलम उठायेगा। 

 

सन्धि का सवाल नहीं,

किसी की जान पे बवाल नहीं 

प्रेमगीत आज कोई न गायेगा। 

 

चाहे तिलक सजा हो भाल पे

या शीश सजा त्रिशूल पे 

छिन्न-भिन्न अंग यहाँ,

मृत्यु ही मृत्यु वहां,

नेत्र देखते हों जहाँ। 

 

अगर मृत्यु के इस नृत्य में,

महाकाल का ताण्डव नहीं 

तो उस नृत्य को ही एक सिरे से तुम नकारना। 

 

माटी में है रक्त मड़ा

और पुष्प हो उसपे खड़ा 

पर रक्त ही केवल यहाँ सुगन्ध हो। 

पुष्प की महक अगर जगा रही दया यहाँ 

तो उस पुष्प की महक को ही नकारना। 

 

शत्रु की ललकार हो या घाव ही पुरुस्कार हों। 

आभूषणों की तरह इन्हें है ओढ़ना। 

 

उपकार जो कोई मिले,

तो ऐसे दाग घावों को

मृत्यु की तरफ तुम्हें है मोड़ना। 

 

तो मूछों पे तू ताव दे

बस घाव पे तू घाव ले 

पर मलहम लगाने की न सोचना। 

 

मृत्यु शय्या पे जो देह—- है —- तेरा अभी गिरा 

धरा हिले या अब —- आकाश का हो काँपना,

पर जीत के निश्चय से तू, अब कभी न ढोलना। 

 

शत्रु के उत्सव का शोर तेरी हंसी के नाद में 

गुम  नहीं हुआ अगर,

तो प्राण यूँ —- अभी न तू त्यागना। 

 

तेरी विजय को रोकने, काल ज़िद पे हो अड़ा 

तू युद्धभूमि में पढ़ा या धड़,—- सिर बगैर खड़ा। 

तो ले महाकाल का वो रौद्र रूप,

पर उस काल को वहीँ पे अब है गाड़ना। 

 

युद्ध जो विशुद्ध है 

फिर बुध का प्रबुद्ध छोड़ 

रण से तू कभी न मुख मोड़ना। 

 


 

 

The Color Of Pain is a creation about the pain in the  eyes of  Indian army martyrs’ family.

Dard Ka Ye Roop
Dard Ka Ye Roop

 

दर्द का ये रूप पहली बार देखा मैंने,

किसी की आँखों से छलकता,

कही लावा बनके धधकता देखा मैंने

जज्बातों  का  सैलाब,

Social Media में उमड़ते देखा मैंने।

बदले की प्यास,

युद्ध से बुझाने का प्रस्ताव देखा मैंने,

न्यूज़ चैनल का अलग ही ओछापन देखा मैंने,

Politicians की बेशर्मी का नया आयाम देखा मैंने

Candle March, और

लोगो के expert comments तक देखा मैंने,

पर जब उन आँखों को देखा मैंने,

तो दर्द का ये रूप पहली बार देखा मैंने।

सहानुभूति  की भीख,

ठुकराते हुए उन आँखों को देखा मैंने,

नम आँखों में अभिमान देखा मैंने।

अजीब सी कश्मकश में हिलौरे ले रहा  मेरा देश,

पर आँखों में उनकी अलग ही ठहराव देखा मैंने।

तो दर्द का ये रूप पहली बार देखा मैंने।

नारे लगाके, क्रिकेट में इंडिया का tatto बनाके ,

DP में तिरंगा लगाके

देशभक्ती पर खुद को  इतराते हुए देखा मैंने

पर जब किसी को तिरंगे में लिपटे देखा मैंने

देशभक्ति  की असल कीमत,

इन आँखों को  चुकाते देखा मैंने।

दर्द का ये रूप पहली बार देखा मैंने।

The Color Of Pain differentiates between the hypocrisy and actual patriotism.


 

BLOOD DOESN’T BOIL

अब खून खौलता नहीं,

आम सा इंसान हूँ इस देश का,

बस जरूरतों की चीज़ें जुटाने में अभी व्यस्त हूँ।

सच को हिम्मत देने की हिम्मत नहीं है मुझमें ,

EMI और LOAN के बोझ टेल अभी पस्त हूँ।

अब खून खौलता नहीं।

 

डर , हार का है इतना कि जीतने की कोशिश तक अब करता नहीं।

मानता हूँ जो दिल से सच, जबान तक लाता ही नहीं।

सजा यहाँ, क्या खून की, कुछ भी नहीं ?

खुद को मारके बस जी तो रहा हूँ।

दर्द कितना भी हो, उफ़ अब करता तक नहीं

अब खून खौलता नहीं,

 

उतरती है साडी आज भी नारी की भरी सभा में,

पर कोई कृष्ण अब अवतरित होता नहीं।

आवाज खुद की दबाके, सत्य को वनवास भेजते कोई झिझकता नहीं।

अब खून खौलता नहीं,

 

सोया नहीं, बस किसी जुल्म को देखने के लिये,

आँखें अब खोलता नहीं

मेरे राम के नाम पर, अल्लाह के बन्दे को लहूलुहान कर

शर्म अब आती नहीं।

अब खून खौलता नहीं।

 

अब रगो में “MNC” है

दूध बहता नहीं

खाने में सब विदेशी है,

देशी पचता नहीं।

इसलिए शायद, खून बनता नहीं।

अब खून खौलता नहीं,

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