Summer: Hindi Poem

Summer: Hindi Poem is about your encounter with scorching heat. The scorching heat can be funny only if you think it only this way. One of the Hindi poems that may help you laugh even in the scorching heat.

Summer: Hindi Poem

 

धोख़े के किस्सों में,

एक और नया अध्याय जुड़ गया।  

जब जून का महीना आते- आते,

पंखे, कुलर ने तो क्या

AC ने भी हमसे मुंह मोड़ लिया।  

 

ठंडे पानी से नहाने नई तमन्ना,

बस दिल में रह गयी,

कमबख्त टंकी ने जब

हमें खौलते पानी के हवाले कर दिया। 

 

प्यास है, की बुझती नहीं,

बार- बार पानी पीयो,

तो लघुशंका की शंका फिर जाती नहीं,

 

” पहले तो नींद हमे आती नहीं,

आई तो बीच – बीच में टूट है जाती

पर पूरी कभी होती नहीं। 

ये किस बात की  सजा 

मुझे है मिल रही, जज-साहब 

मैंने तो इश्क़ करने का

हसीन गुनाह कभी किया ही नहीं।” 

 

इस गर्मी में देखो

सब गर्म मिजाजी हैं। 

पर मेरी क्या ख़ता,

जो अपना तापमान मुझपे माप रही है। 

 

बाइक को तो देखो मेरी,

खुद को मेरी 

वाइफ समझ रही है।

दोनों ही मुझे अब बैठने देती कहाँ है.

एक अपनी गद्दी पर और दूसरी 

चैन के बिस्तर पर।  

 

इस गर्मी में देखो सब गर्म मिजाजी हैं। 

पर मेरी क्या ख़ता, जो अपना तापमान मुझपे माप रही है। 

 

गलती से जो मैंने कार पर अपनी बाँह टिकाली,

तो उसने मुझे जिन्दा जलाने की शादिश ही कर डाली। 

 

इस गर्मी में देखो सब गर्म मिजाजी हैं। 

पर मेरी क्या ख़ता, जो अपना तापमान मुझपे माप रही है। 

 

न जाने कितने खेल खेलें इस छत पे मैंने,

आज नंगे पाँव चला तो 

खुद को अंगारे कर, मुझे पल भर में ही पराया कर गई। 

 

हवा भी अपने साथ, आग की लपटें बहाती हैं,

राहत की साँस न लेले कोई, इसका पूरा- पूरा ध्यान रखती हैं,

कमीनी बिल्कुल मेरी बीबी सा बरताव करती है।  

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