SORRY CHIPKALEE |Hindi Poem

SORRY CHIPKALEE |Hindi Poem is another attempt to break stereotype via Hindi poems. Sometimes, we create beliefs about someone without knowing him or her. And we follow the same path throughout our life. We think one our enemy. If someone tells us that he is our friend, we think that he is also our enemy. PahaNama always love to break stereotypes and move forward. Basically, this kavita is one of the Hindi poems for kids that says science not conventional theory in rhythmic way.

SORRY CHIPKALEE |Hindi Poem

 

SORRY CHIPKALEE, मॉफ कर  दे न छिपकली।

बेवकूफ था मैं जो तुझे समझ न पाया,

उठा झाड़ू तुझे घर की दीवारों से भगाया।

बैठी तो रहती थी तू चुपचाप,

मछरों पे लगाए घात।

 न जाने कितनी बार तूने डेंगू , मलेरिया , चिकेनगुनिया

से मुझे होगा बचाया।

 और मैं बुधु देखके तुझे, डर से  चिल्लाया।

कभी न छुआ तूने मरे खाने को,

और छूके दूषित करने  वालों को देती थी सजा।

कॉकरोच,  मक्खी और न  जाने कौन- कौन लेते थे मेरे खाने का मजा।

बीमार पड़ा तो डॉक्टर ने ये बताया।

छिपकली ने तो कई बार तुझे बीमार होने से बचाया,

करके कॉक्रोच, मक्खी, मछर का सफाया।

SORRY छिपकली, मॉफ कर  दे न छिपकली।

तेरी तरह जाने कितनो को गलत समझा होगा,

बिना जाने JUDGE किया होगा,

गलती से शुभ-चिन्तकों को अपने  से दूर रखा होगा।

SORRY CHIPKALEE, मॉफ कर  दे न छिपकली।

 

 

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