Rose :A Story On Eve Teasing

” Rose :A Story On Eve Teasing” is a conversation between Rose and Beetle metaphorically used for a girl and eve- teaser respectively. We are living in such a hypocrite world where a girl is suggested to wear full covered gown but can’t wear the “attitude” otherwise she will be called with different names or where  she wears short clothes which will be definitely longer than narrow mindedness of our society and talk some of guy friends, she will be called with other names.

So, a complete power is landed upon the male hands. He (Beetle) asks the rose many questions in uncomfortable way by stopping her. Then the conversation takes place where the questions asked by the Beetle show the mentality of society but the problem lies where he thinks himself right.

At the end of the conversation he has no point to explain why he is behaving such a way which is wrong. And realized that he is not more than a victim of illness that is spread over the society. Likewise, there is another creation of mine “Eyes that make uncomfortable” please find out the time to read.

भौंरा : ये तल्खी ये मिज़ाज़ ये बेरुखी

ये गुरुर बता ऐ गुलाब तू लायी कहाँ से

 

गुलाब: ये अदा है जनाब

कांटो के बीच पलने से हमे आयी है .

 

भौंरा : ये कांटो का दामन जो ओढे हुए हो

क्या कोई घाव सीने में लिए गढे हुए हो

क्या पत्थर की मूरत हो चुबता नहीं है

या आँखों से पानी बरसता नहीं है

 

गुलाब:  हर कांटे से मिले कई घाव गढे हैं

कुछ जिस्मानी कुछ रूह तक जड़े हैं ….

पर इन घावों को ज्यादा तवज्जो मैं देती नहीं

एक फ्रिज से बढ़कर इनकी कोई अहमियत नहीं ..

यादें ताज़ा रहती है , वरना मुझे इनकी जरुरत नहीं ..

पर

“” जिनकी वजह से ये घाव लगे हैं

या कांटो के दामन में जकड़ी हुयी हूँ

वो भौंरे गली नुक्कड़ में मंडराते रहे हैं

आवाजे बदल बदल छेड़ते और सताते रहे हैं “”

 

भौंरा : अरे .. भौंरे हैं … आवारा घूमेंगे ही

अदब हमारी फितरत में है ही नहीं…

अरे करिश्मा है तू कुदरत का

यूँही हिज़ाब हर कली को मिलता नहीं …

 

गुलाब: ये काटों का हिज़ाब मैं ही क्यों ओढ़ी हुई हूँ

नज़रों में अपने लगाते क्यों नहीं.

ये रीती रिवाज़ों की पायलें अपने पैरों में सजाते क्यों नहीं  

 


 

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