Quotes that will leave You Thinking

मिलन की दुआ कैसे माँगू उस टूटते तारे से

जो खुद अपने आसमान से बिछड़ा है

 

*आज का दिन भी गया और मैं खुद को पाए बिना आज फिर लौट गया 

 

*Past जितना भी खुबसुरत हो पर आज की आँखों में चुभता जरूर है 

Future का चाहे चेहरा न हो पर आज की आँखों में बसता जरूर है

चाहे बीते कल की याद हो या आने वाले कल को सँवारने की चाह

पिसता बेचारा आज ही है

 

हद है कितनी आवारा होगयी हो तुम

मेरे ख्यालों से ख़्वाबों तक घूमने लगी हो तुम

 

मेरी बाहों में लिपट कर थोड़ा सा आराम करलो

ख्यालों से ख़्वाबों तक घूमते घूमते काफी थक गयी होगी तुम

 

 

साँसे लेना भी कोई भूलता है पर हाँ तुम्हे देखके ऐसा होता है

 

क्या गजब हुनर है लोगों का मेरे नुक्श निकालकर अपनी खामियां छिपाने का

 

 

आज सैकड़ों चाँद जमी पे …

फलक की जमी से जलन बस यूँ ही नहीं …

ज्वार भाटा का डर है जज्बातों का समन्दर संभालता नहीं…

जज्बातों पे हाँ लगाम चाहिए…

अपने फलक पे एक चाँद चाहिए…

अब लहरों की इस उथल पुथल को एक शान्त समन्दर चाहिए ….

 

जितने बड़े पत्थर उसकी राहों में
उतनी ऊँची उछाल इन लहरों की

नज़रे तो केवल गड़ी हैं उछाल पे

पत्थर से टकराना किसी को दिखता नहीं

फुर्सत अगर मिले तो पूछ लेना यहाँ दर्द बहुत हैं इन लहरों के भी

 

ये ज़ज़्बातों ये उम्मीदों ये ख़्वाहिशों की लहरें

कब तक उठकर गिरती रहेंगी ये नयी चाहतों की लहरें

अब इन लहरों की इस उथल पुथल को एक शान्त समन्दर चाहिए

 

कभी कभी हारने के लिए खेल लेता हूँ

अपनों से हारकर रिश्तों को जीत लेता हूँ.

 

अब किसी की आँखों में मुझे नहीं खोना

कि बड़ी मुश्किल से खुद को ढूंढ पाया हूँ

ये वायदा हर बार प्यार में पड़ने के बाद करता हूँ

 

लगता है मेहनत करना सीख़ रहा हूँ मैं

कि अब नींद अच्छी आने लगी है

 

अब हममें किसी और को ढूंढा जाता है

कोई खास है  शायद जो हर जिक्र में नज़र आता है

 

 

” कलम जो पड़ी उसकी, कागज़ में
तो पैगाम जगह-जगह गिरने लगे
पैगाम की जगह कागज बटोर हमने
गीता, कुरान, बाइबिल जैसी न जाने कितनी
मजहबी किताबें पिरो डाली । “

 

 

” उठा दी जो कलम,

तो कागज ही कागज बिछा देंगे
फिर बुन लेना अपना इतिहास

या मजहब कोई नया बना लेना । “

 

 

” डर बहुत लगता है बिकी हुई कलम से मुझे
न जाने किस झूठ को कागज में उतार
दिमाग में छपा दिया हो । “

 

 

” राही, सफर की तू, बस इबादत कर

मंज़िल की जगह कहीं खुदा मिल जाए । “

 

 

” अपनी कलम से कागज में उतरे अपने विचारों में

जब स्वस्थता और शुद्धता पता हूँ

तो जिंदगी ईमानदारी से जीने का हौसला और बुलंद पता हूँ । “

 

 

” पिंजरे के अंदर का फड़फड़ाता पंछी मैं,

लोग मेरी आज़ाद होने की जुस्तजू को ,

मेरी अदा समझ बैठे हैं । “

 

 

” गुमशुदा हैं लोग यहाँ पर,
खुद के अलावा इन्हें यहाँ कोई और ढूंढ़ता नहीं,
खुद की तलाश में निकलते हैं हर रोज़
पर अपना अक्स तक इन्हें मिलता नहीं । “

 

 

” इश्क़ का रोग होता ही, ऐसा है जनाब

बर्बाद होने की आयतें, हम रोज़ पढ़ा करते हैं । “

 

 

” ख्वाहिश पेंटर, बनने की अधूरी रह गयी शायद,

इसीलिए हर चीज़ पर मज़हबी रंग चढ़ाते हैं । “

 

 

” प्यार में घोटाले होते हैं साहब, वरना

माँ की “ममता से सख्ती” और “बाप के प्यार के लिए शब्द” 

गायब नहीं होते । “

 

 

” ख़ूबसूरती के चर्चे हमारे आम हैं और क्यों न हो

पहनके जो निकले हम अपने विचार हैं । “

 

 

Attitude Matters
Attitude Matters

” मेरी हैसियत पूछकर मुझे मत खींच,

 मैं  तेरी  स्वेटर का वो धागा हूँ,

जिसे खींचते ही

तुझे तेरी औकात पता लग जायेगी । “

 

 

” ये कलम दो धारी तलवार है 

किसी एक तरफ झुकी तो दूसरी तरफ कत्ले आम हैं 

नादान है वो जो समझते हैं, कलम सम्भालना बच्चों का काम है। “

 

 

” रख ऊँची उड़ानें और नीची निगाहें परिन्दे 

कि कोई शिकारी घात लगाये बैठा है। “

 

” मंज़िल से मेरा एक तरफ़ा इश्क़ मशहूर है 

मैं तो इसकी तरफ कदम बढ़ाता रहा हूँ,

ये ही मेरी मेहनत से वाक़िफ़ नहीं। “

 

” शायद मंज़िल मुझे ही अपना प्रतियोगी समझ बैठी हैं 

जितने पास मैं जाता हूँ, उतनी दूर ये दौड़ लगाती है। “

 

” वो मंज़िल की ओर कदम दर कदम बढ़ाते जा रहे हैं 

और एक हम हैं की चौराहे पे खड़े होके सोचते हैं

कि किस ओर जाना है और पहुँचना कहाँ है।”

 

” न रच सके वो चक्रव्यु तो षड्यंत्र वो रचने लगे 

मुझे हराने के लिए मेरे दुश्मन, अपनी जीत कर को भुलाने लगे। “

 

” जो गुजरा उनकी गली से मैं भेष बदलकर

क्या गज़ब हुनर मेरे महबूब का पता चला ” पड्यंत्र बनाने में “। “

 

” कभी- कभी गाडी से बाहर झाँककर, 

डूबते सूरज को पीछे- पीछे दौड़ते हुये देखकर सोचता हूँ। 

 कि रूककर पूछ ही लूँ : 

मैं क्या पीछे छोड़ आया हूँ जो लौटने आ रहे हो। “

 

” लोगों को देखकर मैं अक्सर सोचा करता हूँ 

कि क्या गलती की होगी इन्होने जो हमेशा सिर झुकाये रहते हैं।

ओह   —————————    मोबाइल फोन्स “

 

“”””    शायद “मोबाइल फोन्स” इंसानों की सबसे बड़ी गलती है ,

यों ही नहीं हर कोई सर झुकाये रहता है। “”””

 

“” जिस्म पे न घाव मिले, न लिबास में मेरे,  लहू का कतरे  

बेहद करीबी था कोई, जो इतनी सलीके से मैं क़त्ल हुआ।  “”

 

“” निकल तो पड़ा हूँ अकेले, गलतियों की इन अनजान गलियों में 

नाकामियाबियों  का कारवाँ अभी पीछे चलना बाकी है 

ये जिन्दगी बीरबल की खिचड़ी है जनाब इसे चखना अभी बाकी है “”

 

( जंक फ़ूड ): “”” मँहगाई का आलम तो देखो इस खाने  की 

कीमत शरीर को चुकानी पड़ती है। “””

 

“”अभी तो उदय हुआ हूँ, तपिश पानी अभी बाकी है 

अब ज़िद्द है कुछ यूं हमारी कि सूरज को दीया दिखाना अभी बाकी है “”

 

“” लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं 

कि तेरा जवाब “पता नहीं ” क्यों होता है 

और तू इतना मुस्कुराता क्यों है 

मैं मुस्कुराकर कहता हूँ “पता नहीं ” “”

 

 

“” बन्दिसे और रीति – रिवाज़ों की बेड़ियाँ तोड़कर

उड़ने लगी थी पापा की परियाँ। 

कुछ साधिशें  फिर से इस ज़माने ने कर डाली 

चाउमीन और मोमोस की फैक्टरियाँ गली -मौहल्लों में बिछा डाली। 

 

तो अब —————   तो अब ——————–

 

तो अब क्या पापा की परी वो मोटी होगई फिर उड़ न सकी वो पापा की परी। “”

 

 

“” ताना छिपाके बातों की मिठाई  में कुछ ऐसा मारा 

कि  कड़वाहट निगलना अब आसान होगया। “”

 

 

नज़रबन्द हूँ अपने ही घर में कि बाहर हवाओं ने पहरे बैठाये हुए हैं

गुनाहों में शुमार गुनाह है मेरा जो साँस लेने को साफ़ हवा की आस लगाये बैठे हैं

 

 

 

 

“”Life is playing music and you are dancing on it with your extraordinary steps. Suddenly, you find someone dancing with same pace and rythm. When you ask to dance until life stops playing music. Her Secret reveals of having partner.

भाई बहुत हो गया………लहरों की इस उथल पुथल को अब एक शांत समन्दर चाहिए”””

 

 


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