Power of Character: A Story In Hindi

कहते हैं कि आप स्किल्स की वजह से कम अपने करैक्टर की वजह से ज्यादा, उस मक़ाम पर होते है जो आप हाशिल करना चाहते हैं।  हाँ वो करैक्टर जो बनने से पहले कई सीढ़ियां चढ़ के आता है।

पैदा होने से शुरू हुआ ये सफर बचपन,परिवार, स्कूल, दोस्त, कॉलेज, प्यार, breakups, मेहनत , सफलता, असफलता, और न जाने कैसी-कैसी सीढ़ियों से गुजरता है।

ये कहानी है एक सफल, मेहनती बेटे की जो सर्वगुण सम्पन्न है, अपने काम में काफी skilled है, जिसकी समाज में काफी इज्जत है।  दुनिया उसे झुक कर सलाम करती है।

ये कहानी एक बाप की भी है।  एक normal बाप की और उसकी एक कहानी जो बचपन में अपने बेटे को सुनाया करता था।  हम में से बहुत से लोगो ने ये कहानी सुनी होगी।

बाप कहानी सुनते हुए :

एक बार मैं शिकार करने जंगल गया।  पूरा दिन शिकार की तलाश में भटकता रहा पर मुझे कुछ भी नहीं मिला। मैं थक गया और एक झाडी के पास बैठकर उसमे लगे हिंसर ( फल ) खाने लगा।  अचानक झाडी में कुछ हलचल हुई, डर  के मारे मेरे हाथों से बन्दुक छूट गयी।  तभी झाड़ी  से एक शेर निकला और उसने मेरे ऊपर छलांग लगा दी। मैंने अपने डर पर तुरंत काबू पाया और शेर के दोनों पंजे पकड़ लिए।  हम दोनों में जमके कुश्ती हुई।  कभी शेर ऊपर, कभी मैं उसके ऊपर। काफी समय तक ये चलता रहा। अंत में शेर थक गया पर मैं नहीं।  मैंने उससे पुछा अब कभी मुझपे हमला  करने की गलती करेगा।

शेर रोते हुये बोला:

नहीं जी, नहीं जी। गलती हो गयी अबसे ऐसा नहीं होगा, और शेर भाग गया। बेटा ये सब ध्यान से सुनकर बहुत खुश होता था।

पुरे दिन हर समय शेर से लड़ने और उसे हराने  के सपने देखा करता था।

आज: Present Time: 

पर अब बेटा बड़ा होगया है और आज कुछ परेशान है।  बेटे को ऐसा देखकर बाप समझ गया और उसका मूड हल्का करने के लिए वही पुरानी कहानी कहने लगा।  पर बेटा झल्ला गया बोला। अब मैं बच्चा नहीं हूँ जो ऐसी impractical और illogical कहानियों से खुश हो जाऊंगा। आपको शायद पता नहीं , There are real problems to face.

बाप : impractical और illogical नहीं है ये कहानी।

बेटा : तो आपका मतलब ही आप ने शेर को हराया या फिर आप शेर से बात कर सकते हो, या वह आपसे डरके भाग गया, …. ये लॉजिकल है क्यों ?

बाप : नहीं, लेकिन शेर से लड़ना किसे है। कहानी का शेर असल जिंदगी में मुशीबतें हैं।  जो मैंने शेर के पंजे पकडे वो मुशीबतों का सामना करना है नाकि डरना। डरना आम बात है लेकिन उसे काबू करना तो हमारे बस में है। शेर के साथ लड़ना मुसीबतों के साथ डटकर लड़ना है जब तक मुसीबतें शेर की तरह दुम दबाके न भाग जाएं।

बेटा was surprised to listen the essence of story !!!!!!!!!!!!!. हैरान था सुनके जो भी चीज़ जिंदगी में उसने हासिल की है वो सब तो इस कहानी को जहन में रख के की है। कोई भी काम करते समय उसके दिमाग में ये कहानी जाने, अनजाने  में चलती थी। अब  बेटा दुबारा मेहनत करना शुरु करता है लेकिन इस बार कहानी को थोड़ा नहीं पूरा दिमाग में रख कर।

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