Main Nhi Jaanta Main Nhi Maanta: Hindi Kavita

 

मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता- A story of our ignorance
Main Nhi Jaanta Main Nhi Maanta- A story of our ignorance

Main Nhi Jaanta Main Nhi Maanta is a Hindi writing which says a story of our ignorance toward nature. We are lucky that we have seen the real beauty of nature during this lock down wherein everything was looking clean and clear without interference of humans in the nature. It is one of the many things what Pahadnama want to express. To Watch Video click here.

Main Nhi Jaanta Main Nhi Maanta:

All the facts are taken from the newspaper and it is an effort to assemble these information in a form of Hindi Kavita or writing.

* भारत एक ऋतुओं का देश और हर ऋतु में भी अलग- अलग मौसम ।
एक नया नवेला मौसम अभी अभी परिचित हुआ है : लॉक डाउन ।

अरे मॉफ कीजियेगा : जिसे हम मौसम समझ बैठे थे वो अवधि बढ़ने के साथ ऋतु बनता जा रहा है ।
इस नई ऋतु को मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता ।

* अरे अगर एक जगह पर रहना होता तो

ऊपर वाले ने हमे पैर क्यों दिये, पेड़ों की तरह जड़ देदेते।
एक जगह पे रहना, मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता ।

What changes nature showing:

* नदियां इतनी नीली और साफ़ की

मछलियां भी तैरती दिख जाती हैं,
सुना है अब तो डॉल्फिंस भी गंगा में लौट के आ रही हैं,
इतने साफ़ पानी को , मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता ।

* PM पार्टिकल्स अब हैं नहीं, हवा नाक के अंदर जाके चुबती नहीं,

फेफड़े खुश हैं इतना क्यों,कोई पटाखे तो जलाओ, Pollution तो फैलाओ
इस साफ़, शुद्ध हवा को , मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता

* रात को आसमान में चाँद, तारे और तारों में मेरे दादा परदादा सब साफ़ दीखते हैं ,
ऐसे साफ़ आसमान को, मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता ।

Happiness For Wild animals

* हाथियों के झुण्ड इंसानो की बस्ती में उमड़ आये हैं

तो क्या अगर उनके जंगल काट हमने वो बस्ती बसाई है,
अब किसी हाथी की रेल ट्रैक में कटने की खबर अखबार में छपती नहीं,

अखबार दूर फेंककर बेचारा बोलके इंसान होने का अहसास अब होता नहीं ।

ऐसी सुखद घटना को, मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता ।

* एक सवाल है : ” ये हाथी रेल ट्रैक के पास गए क्यों ? या रेल ट्रैक हाथी के पास आये क्यों ? “

ऐसे सवाल मेरी अनदेखी और समझ पे सवाल हैं ।
ऐसे सवालों को, मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता ।

* कभी- कभी दिखने वाले हिम तेंदुए भी

कैमरे के आगे हर दो तीन दिन में दिख रहे है ।

जिन्हे देख आप सभी भी अपने आप को कहने से नहीं रोक पाएं

“वाह” हिम तेंदुए जी “वाह” ।

पर ऐसी अनदेखे अजूबे को

मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता ।

* अरे छोड़ो उन Environmentalists की बातें जो कहते हैं :
जिस जगह जितनी जीवविविधतायें (Biodiversity)होंगी

उस जगह की धरती और प्रकृति उतनी ही स्वस्थ्य होंगी ।

पर अगर आप उड़ती हुई गिलहरी देखलें

तो आप तो खुद को ICE AGE मूवी के अंदर का किरदार मान ले । 

उत्तराखंड में उड़ती गिलहरी देख ये लोग न जाने क्यों इतना खुश है ।

तो धरती की स्वस्थता को

मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता ।

Main Nhi Jaanta Main Nhi Maanta Conclusion:

* प्रकृति की सारी सुन्दरतायें छिप के बैठी थी शायद

मनुष्य के ख़त्म होने के इंतज़ार में।

लॉक डाउन ने इंसानी हस्तक्षेप बंद करवा दिया

तो ये जीव विविधताएं सेलिब्रेशन में बाहर निकल आयी हैं ।
प्रकृति की इन सुंदरताओं को

मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता ।

* सुना है प्रकृति बाउंस बैक करती है,

लॉक डाउन ख़त्म हो जाए

तो हम भी दुगनी रफ़्तार से,

गाड़ियों के शोर से, जंगल हतियाके,

Pollution फैलाके बाउंस बैक करेंगे।
क्योंकि हमसे कोई बेहतर है प्रकृति में

मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता ।

 

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मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता line:  शायर हबीब जालिब

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