Kalam: कुछ दिनों से कलम मेरी,  खुदा खुद को  है समझने लगी।

My kalam is not writing anything these days. I am trying to convince her but neither she is writing nor answering me why she doesn’t want to write. So, I assume. May she got pride of her writing and comparing herself to God.

 

कुछ दिनों से कलम मेरी, 

खुदा खुद को  है समझने लगी।

 

What are the reasons? May be she has written lots of beautiful things about love and people started celebrating it God of Love.

माशूका को सलाम खत में पैगाम लिख 

कईओं की सुलगने लगी। 

 

 रात भी जल ऊठे, जुल्फों से उसकी 

चाँद भी सँवारे खुद को, देख वो चेहरा नूरानी 

हवा भी चाहे झूलना, उन मनचली लटों  में 

इश्क़ भी इबादात सी है, लगने लगी,

इस करिश्मे को अंजाम देकर,

क्या खुदा खुद को  है समझने लगी।

 

कुछ दिनों से कलम मेरी, 

खुदा खुद को  है समझने लगी।

May be My kalam has won so many battles in past years and remain invincible. So, she has started to think herself God of War.

 

तलवार से पैनी, धार है लेखनी

पकडे वही जिसे जंग है जीतनी,

बिना रक्त बहाये, बिना हाथ उठाये

युद्ध भूमि की दिशा है बदलनी 

असंभव से इस काम को संभव सा कर 

क्या खुदा खुद को  है समझने लगी।

 

कुछ दिनों से कलम मेरी, 

खुदा खुद को  है समझने लगी।

Another reason of My kalam to think her God may it has written many histories, religious books with its deep sense of meaning.

अक्षर लिखे, लिपी बुनी

गहराई में उतर, हर सीपी चुनी

गीता लिखी, कुरान लिखी

मज़हब  की हर ज़बान लिखी

फरिश्तों का अक्श, तुझसे ही होकर

कागज पर उतर आया।

क्या इसलिए खुदा खुद को  है समझने लगी।

 

कुछ दिनों से कलम मेरी, 

खुदा खुद को  है समझने लगी।

My kalam listened all the pleas and try to tell something but stopped suddenly. Why so?

सुन यह,

कलम मेरी सहम सी गई,

 कुछ लिखना चाहा पर फिर थम सी गई।

शब्दों का भार उठा नहीं पा रही,

इसलिए शायद  कलम मेरी कुछ लिख नहीं पा रही।

Finally my kalam has opened up and tells why she doesn’t want to write or tell anything.

बोली

लिखती तो  हूँ सच, पर हो जाते  कई रूप हैं

खुदा के साथ भी तो हुए ऐसे कई फरेब हैं।

Kalam is broken out with tears and tells what she feels about herself nowadays.

 

फरिश्तों के हाथों में रहने वाली कलम मैं,

बजारूं हो गयी, अब बेईमानी के इल्म में

खुदा भी तो मेहरबान, फरिश्तों पे ही हुआ करते थे

आज हर नुक्क्ड़, चौराह पर बेईमानों के हाथों नीलाम हुआ करते हैं।

Now my pen started taking my criticism in apt way. And comparing herself with God. As Kalam is unable to do anything just like God.

समझ में आ नहीं रहा कुछ मुझको,

खुदा की समझ भी मुझसे परे नहीं है।

इसलिए खुदा खुद को  हूँ  समझने लगी।

कुछ दिनों से कलम मैं तेरी, खुदा खुद को हूँ समझने लगी।

This is view of my Pen on the things happening in our country and due to it she is not feeling to write. Do, you want to read other quotes on different topics follow the link.

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