Jagat Bhaiya A Rakshabandhan Story

Jagat Bhaiya A Rakshabandhan Story

Jagat Bhaiya A Rakshabandhan Story based on a boy from a very small town.

Hindi Stories By Kagaj Kalam

Jagat Bhaiya A Rakshabandhan Story

” रक्षाबंधन: भाई- बहिन का त्यौहार।” ये तो अब पता लगा पर कक्षा 8 तक तो किसी अत्याचार से कम नहीं लगता था। आजकल तो बच्चे कितने Excited होके रक्षाबंधन का इंतज़ार करते है। और मैं 1 हफ्ते पहले से ही पूजा- प्रार्थना शुरू करदेता था।

PahadNama

क्यों ? तो सुनो।

पहले तो हिंदी Medium, ऊपर से शिशु मंदिर और विद्या मंदिर में पढ़ना। भाई स्कूल नहीं है वो भैया- बहिन बनाने की फैक्ट्री है। हर किसी को भैया बहिन बोलके बुलाना पड़ता है। अगर तुम्हारे मम्मी- पापा भी स्कूल मीटिंग में आयें तो उन्हें भी भैया और बहिन बुलाना पड़ता है। और शायद वो भी एक दूसरे को भैया और बहिन बोले वहां पे। ठीक है ठीक है ये अतिश्योक्ति कुछ ज्यादा ही हो गयी। लेकिन ये काफी हद तक सही है।

जिन्हे शिशु मंदिर और विद्या मंदिर नहीं पता उन्हें बतादूँ ये विद्यालय हैं मतलब ” स्कूल ” हैं जहाँ हर कक्षा में 10 फुट की ऊंचाई पर सरस्वती माता की फोटो टंगी होती है। और ये स्कूल किसी भी पर्व को एक दिन पहले मनाते है। इनका फेवरेट पर्व है ” रक्षाबंधन “।

पर मेरे लिए डर का कारण था। इसके पीछे कई कारण थे। १: भाषण देना २: लड्डू याद से लेजाना ३: उन लड़कियों से बचना जिन्हे पसंद करते थे, और काफी परेशान किया हो, ताकि वो राखी न बांधें।

” अपने बचपन का एक ये लॉजिक समझ नहीं आया कि  जिस लड़की को पसंद करते थे उसे परेशान क्यों करना जैसे उसकी चुटिया खींचना, उसका टिफ़िन चुरा के खाना, उसका बस्ता सरस्वती माता की फोटो में टांग देना।”

“ये भी समझ नहीं आता की राखी इन सब की Punishment कैसे। जो उनकी आँखों में Determination दीखता था कि आज तो इसे राखी बांध के छोडूंगी और बदला पूरा होगा। “

कोई लॉजिक दिखा आपको इन बातों का। नहीं न। बचपन में भी अगर लॉजिक ढूंढ़ते तो बचपन को जीते कैसे।

पर ताजुब की बात ये हैं कि ये सब काम भी कर जाता था। जो लड़की राखी बाँध देती थी उसे 1 साल तक परेशान नहीं करना। कोई परेशान करे तो संकट मोचन बनना। इस तरह शिशु मंदिर और विद्या मंदिर कामयाब हुए जगत भैया बनाने में।

असली काण्ड

अत्याचार यहाँ पे तक नहीं थमा। असली काण्ड तो त्यौहार के दिन घर पे होना था।

राखी का दिन, अंकल लोग अपनी लड़कियों के साथ घर पहुँचने लगे। इन अंकल लोगो को déjà vu की सिद्धियां प्राप्त थी ये फ्यूचर को ऐसे ही भांप लेते थे जैसे शिकारी अपने शिकार को। माना हम बच्चे लोग शातिर नहीं थे या उनके बराबर अक्लमंद नहीं थे पर शहीद होने से पहले एक आखिरी जंग पुरे जी जान से लड़ने को तैयार थे। तो 9 बजे उठने वाले हम 6 बजे ही खेलने निकल गए। और पूरा ध्यान रखते थे कि अपने नाम की आवाज, अपने ही कानों तक न पहुंचे और पूरी सिद्द्त के साथ इग्नोर करें।

पर जो खेल हम बच्चों ने खेलना शुरू किया था उस खेल के माहिर थे अंकल लोग। फील्ड पे ही पहुँच गए और मुझे कहने लगे बेटा बस पांच मिनट के लिए घर चलो राखी बँधवाके आजाना। मैंने कहा बहुत Important मैच हैं आ नहीं सकता। अंकल ने दूसरा पता फेंका अरे भाई साहब आप ही बुलाओ मुझे पहिचाना नहीं शायद इसने। आपका लड़का हैं बात नहीं टालेगा। ” अब अगर पापा बुलाते हैं और बात नहीं मानी मौहले के सामने तो लड़का हाथ से निकल गया कहेंगे अगर मानी तो हमेशा हाथों को इस तरह कोसूंगा जैसे मोर अपने पैरो को कोसता हैं। “

पर पापा कहीं और किसी से बात करने में बिजी थे, तो सुना नहीं या फिर शायद समझ गए होंगे। मेरा मतलब मैच कितना इम्पोर्टेन्ट हैं और नित्तर।

पर ये अंकल हार कहाँ मानने वाले। इन्होने अगला पता फैंका: कहने लगे हाँ सही कहा मैच ज्यादा Important हैं (तो अपनी लड़की को बुलाते हुए ) बेटा तुम ही आजाओ फील्ड में और जल्दी से राखी बाँध के चले जाना भैया कबसे खेल बीच में रोकके खड़े हैं। पहले तो वो लड़की ने मना किया पर कुछ ज्यादा ही Insist करने पर फील्ड में आ ही गयी।

” देखो यार होनी को कौन टाल सकता हैं जो होना हैं वो होके ही रहता हैं।” वो आयी मेरे सामने खड़े होगयी, उसकी आँखों में साफ़ दिख रहा था कि वो राखी बाँधने में कोई Interest नहीं हैं। ये पहला और आखिरी रिजेक्शन था जो मुझे भी अच्छा लग रहा था। पर अंकल की वो शैतानी मुश्कुराहट आज भी मेरा सबसे बड़ा Nightmare हैं जब मैंने राखी बन्दवाने को हाथ आगे बढ़ाया।

जैसे जैसे राखी बंधवाने को हाथ आगे बढ़ा रहा था, भगवान् से भरोसा उठते जारहा थ। इतनी सारी प्रार्थना का कोई भी सिला नहीं था क्या ? तब एक आवाज कानो में गुंजी। ” जाके रखो कनैया, जगत भैया न बना सको कोई। ” एक दोस्त आया और उस लड़की को बोला तू मेरे साथ स्कूल जाती हैं पहले मुझे बांध राखी, 6 दोस्तों ने राखी बंधवाई। राखी होगयी ख़त्म जगत भैया बनने से बच गए हम।

अंकल कि डेजा वो का कनेक्शन शायद बीच में ही कहीं टूट गया था जो ये वाला फ्यूचर नहीं देख पाए। “Best Of Luck For Next Year”

Previous Post Next Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *