Hindi Poems on Environment

Hindi Poems on Environment | पर्यावरण पे कवितायेँ |

Hindi Poems on Environment by Kagaj Kalam, is an effort to understand a lost relation between humans, animals, and environment.  A collection of Hindi poems gives us time and perspective to think where we have missed to maintain our beautiful relation with environment. With this deteriorating relation, we are also loosing our connection between mind, body, and spirit. And now we wonder why we live unhappy, most of the time.

PahadNama

Hindi Poems on Environment

Get here different Hindi Poems on Environment that tells you the beauty of nature, mountain in form of kavita.

 

Environment day poem in Hindi

भारत एक ऋतुओं का देश और

हर ऋतु में भी अलग- अलग मौसम

हर मौसम का अपना अपना मिज़ाज़

किसी अनदेखे नए मौसम को मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता।

 

ऐसी अनदेखी में एक नया मौसम परिचित हो रहा है

अवधि बढ़ने के साथ जो ऋतु बनता जा रहा है।

ऐसी  नई ऋतु को मैं नहीं जानता मैं नहीं मानता ।

 

हम केवल घूमने को हैं बने,

क्या पेड़ों की तरह जड़ में हैं सने

पैर नहीं जड़ देते तो एक ही जगह पर खड़े रहते ,

इस एक जगह पर खड़े रहने को

मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता । ( Continue Reading )

 

 

 

Pollution slogans in Hindi

एक शाम वो अपने घर फलक से निकला

तो आज तक वापिस नहीं लौटा…

ढूंढा बहुत पर कोई सुराग हाथ न लगा

सोचा FIR लिखवालुं पर कोई सुद लेना वाला ही नहीं..

आज पन्द्र वान दिन है Read more

 

 

Poem in Hindi on environment

टिड्डियों के हमले नये नहीं

न जाने क्यों जाने पहचाने लगते हैं।

जिस जगह से उड़ते हैं

पूरी की पूरी हरियाली चटकर जातें हैं।

जिस तरह से जंगल के जंगल सारे के सारे कट जाते हैं।

टिड्डियों के हमले नये नहीं (Compete Read)

 

Poem on save animals in Hindi

पहाड़ों की धरती, अब आग है, यों उगलने लगी

मानों सीने में बरसों पुराना, ज्वालामुखी सुलगाये हो बैठी।

जंगल जले हम मूक रहे,

जानवर जले हम अंधे बने,

अनसुना कर उनकी पुकारों को,

हम बधिर भये, शर्महीन हुए।

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Quotes on nature in Hindi

 ” कहती हैं ये नदियां वापस चल अपने पहाड़,

इन शहरों में तो हम भी नालों से ज्यादा कुछ भी नहीं । “

Continue Read 

 

 

 

Slogan on save trees in Hindi

अपने हाथों ही काटी है , अपनी साँसे।

एक पेड़ के साथ कई छांव काटी है उसने।

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Poem of environment in Hindi

अहम् ब्रह्मास्मि !

मैं ही हूँ दुनिया का सबसे बडा रचनाकार

मैंने ही बांधे हैं  दरिया को लांगने को पुल

नदियों को उनकी औक़ात में रखने के लिए बाँध

मेरे ही आदेश पर मुडती है नदियां जिधर चाहूँ उधर   ।।

अहम् ब्रह्मास्मि ! Read compete

 

About nature in Hindi poems

अरे एडवेंचर्स के शौकीनों

ट्रैकिंग, राफ्टिंग, बंजी जंपिंग

जैसे महंगे नशे तो खूब किये होंगे तुमने

चलो तुम्हे सस्ते एडवेंचर का नशा कराते हैं

आओ बस से तुम्हे पहाड़ घुमाते हैं। Read More

Poem on animals in Hindi

चोर नहीं

वो चोरी उसके शब्दकोष में नहीं,

जानवर है मेरी बिल्ली,  इंसानो की फितरत में अभी रमी नहीं,

मेरी गैर मौजूदगी में भी दूध में पतीले पे वो मुँह तक मारती नहीं,

For compete read:  Cat  Love 

Environment poem in Hindi

आंखें सुर्ख, नींद अधूरी जैसे किसी सपने का क़त्ल करके आया हो,

चेहरे पे तल्खियों की सलवटें, बातों में

वो चिड़चिड़ापन जैसे खुशियों का गला दबाके आया हो,

पर टीकेँ हैं,

एक दिन घर जाने के ख्वाहिश लिए जिंदगी की कश्मकश में मजबूती से टीकेँ हैं,

For More: Mera Ghar

 

Hindi poem on environment

You may find this strange as everybody is interested to see the beauty of nature but the Hindi poem on environment forbid you to come and enjoy the beauty of Pahad. 

मत सुन रे मुसाफ़िर

इन डाली- डाली फुलों की

मत सुन रे मुसाफ़िर

इन डाली- डाली फुलों की

जो तुझको बुलाते हैं

मुझ पहाड़ में ।

Full Read

Poem in Hindi on nature

Almost everybody look for a story to go far in deep of jungle in Pahad. This poem in Hindi on nature is saying one of those.

चाय पीने के बहाने से,
जब जा पहुंचे इन पहाड़ों में,
खो चले इन नज़ारों में,
दूर होती सबकी निगाहों से
होके सवार हम स्कूटी में
जब जा पहुंचे इन पहाड़ों में,

Read Hindi Poem 

 

Save earth slogans in Hindi

पहाड़ों की धरती, अब आग है, यों उगलने लगी

मानों सीने में बरसों पुराना, ज्वालामुखी सुलगाये हो बैठी।

जंगल जले हम मूक रहे,

जानवर जले हम अंधे बने,

अनसुना कर उनकी पुकारों को,

हम बधिर भये, शर्महीन हुए।………पहाड़ों की धरती

 

 

 

 

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