Geeli Mitti | गीली मिट्टी | पहाड़नामा |

Geeli Mitti is another story of new thought process of Pahad written in PahadNama and Kagaj Kalam.

R

Geeli Mitti: A Story of Change

जिस मकान में सुकुन, स्वस्थ्य , अपनापन न हो, वो मकान , केवल मकान है,  घर नहीं । एक middle class आदमी अपनी जिन्दगी का hard earned money लगाकर मकान बनाता है, ये सोचकर कि उम्र के एक पडाव पर वो सुकुन से घर में रहे। पर वो मकान गर्मियों में बहुत गर्म और सर्दियों बहुत ठंडा रहे तो वो सुकुन दे पाएगा ?  क्या घर बन पायेगा ?

सुकुन पाने की कोशिश में AC , Heater, केमिकल वाले Paints  का सहारा लेना पडे तो क्या मकान में स्वास्थय और अपनापन जैसी केयर शामिल होगी ? क्या वो घर बन  पाएगा ?

सीमेंट, लोहा ,ईंट , AC ,सब मिलकर उस मकान को विषैले गैस का chamber बना लेते हैं, immunity  weak होने लगती है और आप बीमार पडने लगते हैं। माना सीमेंट , लोहा, ईंट ने मानव सभ्यता को एक ऊंचाई तक पहुँचाया है पर ये concept तो उन जगहों का हिस्सा है जहाँ Natural cooling सिस्टम नहीं था अगर same concept पहाडों में apply किया गया तो  पहाडों में भी पेडों के जंगल के बजाय कंक्रीट के जंगल ही दिखेंगे और उसके unnatural life impacts  जिससे बचने के लिए ही तो आप शहरों से पहाड आते हैं।

आधुनिकता के नाम पर हम जिस भेडचाल में शामिल हुए हैं वो हमें, केवल हमारे पारम्परिक sustainable  पहाडी भवन निर्माण शैली से निकालकर ईंट , सीमेंट , लोहों के मकानों में ठूंस रहे हैं। ऐसे ही कुछ मानना है शगुन सिंह का । 

Geeli Mitti: कौन है शगुन सिंह  ?

बिहार में जन्मी एक लड़की जो अपनी संस्था  Geeli Mitti (गीली मट्टी ) के माध्यम से , पहाड़ की पारम्परिक भवन निर्माण शैली को न केवल पुनजीर्वात कर रही है, बल्कि उन्हें भुकम्परोधी और Eco-friendly बनाकर आधुनिकता की नई परिभाषा गढ़ रही है। 

कई multi national company में काम करने के साथ-साथ शगुन सिंह ने देश – विदेशों  में पर्मीकल्चरऔर architecture का प्रशिक्षण भी लेती रही ताकि:  एक दिन पहाड़ में अपना घर, अपने हाथों से बनाने का सपना पूरा कर सके । 

सपनों का घर Geeli Mitti

शगुन सिंह ने 2015 में नैनीताल के महरोडा पगूठ क्षेत्र में जमीन खरीद कर,  अपने सपनों की नींव रखी । मिट्टी और लकड़ी का model house तैयार किया और फिर उन्हें आकर्षक बनाने के लिए पुरानी भवन निर्माण शैली को,  नयी designing का सहारा दिया । 

भवन निर्माण– Geeli Mitti

लकड़ी, बांस, और मिट्टी का फ्रे म तैयार करने के बाद सीमेंट के कट्टों में मट्टी भरकर दीवार बनायीं गई. चिकनी मट्टी से भीतर और अन्दर दीवारों पर लि्पाई की । ताकि सर्दियों में घर गर्म और गर्मियों में ठंडे रहें। ये केवल भवन नहीं,  बल्कि Ac , heater जैसे shortcuts के मुंह पे sustainable development का  एक करारा तमाचा है । 

शुल्क और कार्यशाला: गीली मिट्टी

पर्यटक और आसपास के लोगों से तारीफें मिलने के बाद,  शगुन सिंह ने उन्हें भी प्रशिक्षण देने का फैसला किया । इस कार्यशाला के लिए Pocket friendly शुल्क भी निर्धारित हैं। 

  •  1 month and 15 days की कार्यशाला में ग्रामीणों के के लिए मुफ्त प्रशिक्षण 
  • जबकि पर्यटक के लिए शुल्क nominal है 

अभी तक शगुन सिंह: अमेरिका, फ्रांस , नेपाल , जर्मनी , जापान , इंग्लैंड ,  और इटली समेत 20 से अधिक देशों के 200 से ज्यादा लोगों के प्रशिक्षण दे चुकी हैं। ” शुगुन सिंह कहती हैं : आजकल के घरों की आयु 60 to 70 years होती है पर गीली मिट्टी की इस तकनीक से बने घरों की आयु हज़ार साल तक होती है।  ” 

True Modernization: Geeli Mitti

आधुनिकता का मतलब  ये बिल्कुल नहीं है,  की जो समाज में चल रहा है, आप उसे,  आँख बंद करके अपनाये,  वो के वल भेडचाल है। 

आधुनिकता का मतलब है आप उन चीजों पर सोच विचार करें, उस चीज़ से किस – किस को कितने लम्बे समय तक लाभ मिल रहा है ये देखें। फिर बाद ही decision लें. हाँ हमेशा decision सही नहीं होगा लेकिन,  समय और विचारों की कंजूसी से लिए गए, decision से बेहतर और well informed होगा ।

 

Previous Post Next Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *