Environment Day In 2020

टिड्डियों के हमले नये नहीं

न जाने क्यों जाने पहचाने लगते हैं।

 

जिस जगह से उड़ते हैं

पूरी की पूरी हरियाली चटकर जातें हैं।

जिस तरह से जंगल के जंगल सारे के सारे कट जाते हैं।

 

टिड्डियों के हमले नये नहीं

न जाने क्यों जाने पहचाने लगते हैं।

 

न मिली हरियाली तो

एक दूसरे को खा खा मर जाते हैं।

जैसे दूर देश में काले गोरे, मेरे देश में भगवा हरे

यूँही लड़ लड़ मर जाते हैं।

टिड्डियों के हमले नये नहीं

न जाने क्यों जाने पहचाने लगते हैं।

पर्यावरण का हिस्सा होकर पर्यावरण के ही चीथड़े उड़ाते हैं

जब अनानास में बम भरकर वो हथिनी को खिलाते हैं।

 

टिड्डियों के हमले नये नहीं

न जाने क्यों जाने पहचाने लगते हैं।

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