Dussehra 2019: Happy Dussehra Messages, Quotes, Dussehra Whatsapp Messages

When knowledge shuts the door for intuition or cuts the wings of thoughts, it is not serving its purpose anymore. What I feet the most difficult task is unlearning and start the things from scratch with different approach. With these points I see Raavan as “Knowledge” and Ram as “Intuition”.

Raavan was best in all the leanings, rituals, & other things of that time which made of above all the Devas, Rakshash, and Humans. However Ram learned all those things but unlearn these things and start them be it laws, be it living the way of life, or be it liberty to follow ones’ own belief  in different way from zero.

Today we need that type of thinking which Ram had but we are overpowered by Raavan’s way of thinking. We can’t differentiate between education and training. Training is always trying to overpower the education in today’s world. We forget that training is the only part of education in a single approach but education can create such kind of various training.

Here I am simplifying the training and education. Ramayan perspective training can be what you have read about Ram or Raavan from your source and not ready to give freedom to other opinion but education makes you free that you can pick any scenario and know it as your own way. These are wings which only education can give.


I have a story to tell from the Ramayana.

There was a time when Sita got abducted by Raavan and kept in Ashok Vatika. People around her were vicious and always try to break her optimism. Surpankha created an illusion of beheading Ram to demoralize Sita. Of course, you guys are surrounded by such vicious people. What do you do in such case?

What Sita did, I tell you.  Sita engaged her in serving animals, creating garden, teaching Rakshasha’s kids, and other such creative activities. Tell me what’s your step. May be people out there need your magic bean.

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Here I present you some of my creation on dusherra.

1:

हाँ मैं रावण हूँ। 

सुना था की हुई थी मेरी हार 

फिर भी अमर बनाया हुआ है मुझे ये संसार 

राम नाम भजता है जग सारा

पर अंदर ही अंदर चरित्र तो अपनाया हुआ है हमारा। 

 

हाँ मैं रावण हूँ। 

छली हूँ, अहंकारी हूँ, सीता हरण करने वाला दुराचारी भी हूँ 

पर न्याय हुआ मिली थी मुझे सजा 

धन्य हो राम त्रेतायुग को न होने दिया बदनाम,

तुम्ही दे सकते थे, न्याय को उच्चतम सम्मान। 

पर कुछ प्रश्न थे पूछने प्रभु श्री राम 

क्या हट गयी है अब मेरे पापों की दूकान 

 

हाँ मैं रावण हूँ। 

बहरूपिया था, साधु भेष में था आया ,

पर राम नाम के चोले में, छिपा अपनी तलवार, शैतान ले आया,

जय श्री राम बोलके बेह्गुनाहों पर वार करते हुए जरा भी नहीं कतराया। 

 

हाँ मैं रावण हूँ। 

देवताओं की पूजा बंद कराकर, ब्राह्मणो पर मैंने किया था अत्याचार,

धर्म परिवर्तन को बाध्य करा, कराई थी अपनी जयजयकार,

तलवारों के जोर में आज भी  आती है कुछ  ऐसी पुकार। 

 

हाँ मैं रावण हूँ। 

एक सीता के हरण में पुष्पक विमान था बस साथ 

कई लड़कियां अगवा होती हैं और गाड़ियां रहती हैं बस आम बात। 

 

हाँ मैं रावण हूँ। 

अगर वो सही तो मैं गलत कैसे,

अगर वो गलत तो न्याय अभी तक क्यों नहीं। 

हाँ मैं रावण हूँ। 

 


2:

ये जश्न-ऐ दहशरा है भाई ,

मनाने के लिए बड़ी समझ चाहिए। 

 

कब तक रावण की हार मनाएं, 

कभी तो राम की जीत मनानी चाहिए। 

 

आधा खाली है गिलास कब तक देखें 

कभी आधा भरा है गिलास देखने का नजरिया चाहिए। 

 

दहशरा मनाने के लिए भाई बड़ी समझ चाहिए,

नफरतों को एक तरफ़ा रखने की थोड़ी सी समझ चाहिए। 

 

अगर, पत्नी का हरण करने वाले के पास,

शिक्षा हेतु अपने भाई को भेजने वाला राम चाहिए,

तो अपने मृत्यु दाता की इच्छा का सम्मान

करने वाला रावण भी चाहिए। 

 

यूँ ही नहीं, दहशरा मनाने के लिए भाई बड़ी समझ चाहिए। 

 


3:

अगर सपना या लक्ष्य सीता सा पावन है 

फिर चाहे विपदा रावण सी हो या समुद्र सी ,

तो राम कोई न कोई सेतु बना ही लेंगे।  

 


4:

सामने समस्यायें रावण जैसी हठी हों,

तो राम को हनुमान जैसे मितों की जरुरत पड़ ही जाती है। 

 


5:

हार हो तो रावण जैसी, 

कि राम की जीत का पर्व भी

दशहरा (दशानन  हारा ) के नाम से मनाया जाता है।

 


6:

रावण : जीते तो मैंने भी कई युद्ध है 

पर मेरी हार के चर्चे ज्यादा मशहूर हैं। 

 


7:

युद्ध रावण  ने कुछ ऐसा लड़ा 

कि राम की जीत की पहचान  भी  रावण की हार ” दशहरा  ” से है। 

 


8:

रावण : हार हो या जीत बस वो क्षण तुम्हारे नाम से जाना जाये। 

 


9:

अगर अपराधी को अपने अपराध पर घमण्ड  है तो 

“सजा ” भी उसे “अत्याचार” से कम नहीं लगेगी। 

 

रावण का अपराध किसी तीर से कैसे मर सकता था, 

वो मरा तो अपराध बोध से, जब राम ने हारे हुए रावण को, 

लक्ष्मण को सीखाने का सम्मान दिया। 

 

राम की बात ही अलग है:

भले ही राम का नाम राम से बड़ा हो न हो, 

लेकिन राम को पूरी तरह से जानना 

” एक कभी न ख़त्म होने वाली विचार धारा है “

 


10.

पूछ रहा था वो जलता रावण झाँको अन्दर और बताओ तुममें से हाँ राम कौन है


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