Dard Ka Ye Roop Pahli Baar Dekha Maine: A Hindi Poem

Dard Ka Ye Roop Pahli Baar Dekha Maine is a Hindi poem written for the soldiers and their family, especially the soldiers who lost their life in war. The Hindi kavita is more than a tribute but hypocrisy of politicians, news channels, and even the citizens who don’t even try to match empathy to the families of these martyr army personnel.

Dard Ka Ye Roop Pahli Baar Dekha Maine:

A small tribute to the families of those martyrs and we pray to God to give them courage to bear the loss. The Color Of Pain differentiates between the hypocrisy and actual patriotism. Click the link to watch the video. 

Dard Ka Ye Roop
Dard Ka Ye Roop

 

दर्द का ये रूप पहली बार देखा मैंने,

 

किसी की आँखों से छलकता,

कही लावा बनके धधकता देखा मैंने

 

जज्बातों  का  सैलाब,

Social Media में उमड़ते देखा मैंने।

बदले की प्यास,

युद्ध से बुझाने का प्रस्ताव देखा मैंने,

न्यूज़ चैनल का अलग ही ओछापन देखा मैंने,

Politicians की बेशर्मी का नया आयाम देखा मैंने

 

Candle March, और

लोगो के expert comments तक देखा मैंने,

पर जब उन आँखों को देखा मैंने,

तो दर्द का ये रूप पहली बार देखा मैंने।

 

सहानुभूति  की भीख,

ठुकराते हुए उन आँखों को देखा मैंने,

नम आँखों में अभिमान देखा मैंने।

 

अजीब सी कश्मकश में हिलौरे ले रहा  मेरा देश,

पर आँखों में उनकी अलग ही ठहराव देखा मैंने।

तो दर्द का ये रूप पहली बार देखा मैंने।

 

नारे लगाके, क्रिकेट में इंडिया का tatto बनाके ,

DP में तिरंगा लगाके

देशभक्ती पर खुद को  इतराते हुए देखा मैंने

 

पर जब किसी को तिरंगे में लिपटे देखा मैंने

देशभक्ति  की असल कीमत,

इन आँखों को  चुकाते देखा मैंने।

 

दर्द का ये रूप पहली बार देखा मैंने।

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