Coronasur

रोजाना की तरह अपने ऑफिस के बाहर चाय सुट्टा मारने पहुंचा

तो देखता हूँ कोई नहीं सब खाली एक दम खाली ..

 

सिगरेट जलाते हुए पूछा:    क्या बात अंकल कोई आया नहीं

अंकल चाय देते हुए : कोरोना बेटा कोरोना…

बात शुरू ही हुयी थी की गिलास से धुँवा उठा और कुछ जिन्न सा बाहर आया ….

मेरी फट गयी ….. आँखें, अंकल की भी फट गयी… गैस पे रखा दूध 

ही हा हा ….. मैं हूँ करोणासुर ……

 

मैंने कहा: वो ..corona virus… है ….

वो बोला: मैं अभी भारत में हूँ …

मैंने डरते हुए पूछा: भाई दर्शन देने की वजह ..

वो बोला: सेलिब्रेशन…

मैंने कहा : किस बात का…

 

वो बोला: एपिडेमिक घोषित हो चुके हैं हम तूच मानव, 

 हमारे पूजनीय ( दोनों कानो पे हाथो से तोबा करते हुए)

एबोला उस्ताद को कितने लोगो को परलोक पहुँचाना पड़ा था

तब जाके उन्हें ये स्थान प्राप्त हुआ था ..

मैंने तो केवल एक ही की जान ली है

तीन साले सही हो गए है .. 81 को इन्फेक्ट किया है

बाकी कोशिश जोर शोर से चल रही है …

 

मैंने इंटरप्ट करते हुए बोला : भाई ऑफिस में काम बचा है करके आता हूँ ..

वो बोला : बैठ बे लगु तुझपे क्या ??

अपनी सक्सेस स्टोरी शेयर करते हुए बोला: भारत में इतने लोग भू स्खलन , भूखमरी , मोब लॉन्चिंग से मरते हैं

पर हर किसी को ये कवरेज कहाँ मिल पता है मेरे जैसी कोई खुश किस्मत बीमारी होती है

जिसे इतना नाम ,भरोसा, नफरत मिलता है

 

मैं धन्यवाद देता हूँ

उन senitizor कम्पनीज को

जिन्होंने मुझमे पोटेंशियल देखा

इतने कम रिकार्ड्स के बाबजूद भी

  मुझे अपनी मार्केटिंग टीम में शामिल किया …

Actually उनका पूरा बिसनेस अभी मैं ही सम्भाल रहा हूँ ..

हर दिन अलग शहर में एक केस का कैंपेन चला देता हूँ.. ..

 

दूसरा मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ: सरकार का जिसने मुझे काम सौंपा है

की एक जगह में एक साथ कोई इक्कट्ठा न हो

चाहे वो सिनेमा हॉल हो, स्कूल, ऑफिस या शाहीन बाग़…

ये बहुत ही बड़ी जिम्मेदारी है मुझ पर क्यूंकि आप ऐसे देश में रहते हैं

की अगर आधे लोग भी आप विश्व के किसी कोने में भी भेज दे… भीड़ तबभी रहेगी

 

हाँ लौंडे नाम क्या है तेरा ? छोड़ जरुरी नहीं ..

आयी बात समझ में .. या बाउंसर गयी .. मेरा खौफ इस लेवल का है

कि जो देशी अंग्रेज बिना जेट वाले कोमोड यूज़ करते थे

केवल पेपर के साफ़ करके बिना हाथ धुले चले आते थे

वो भी मेरे खौफ से senetizer पे senetizer ख़त्म कर रहे हैं..

 

” Thank you all for making me what I am Today.”

नहीं तो आम सावधानियाँ बरत कर भी मुझसे निजात पाया जासकता है …..

 

साले का कुछ ज्यादा ही ज्ञान हो रहा था

मैंने पूछा पर एक बात बताओ आप इस गिलास के अंदर कैसे आये …

जैसे ही वो गिलास के अंदर गुसा मैंने तो भैया ऑफिस की तरफ रेस लगा ली ..

पता नहीं कल अंकल की चाय मिलेगी या वो खुद 82th केस बनके मिलेंगे




एतियाद कोरोना से:

 

साथ चल पर दूरियों की इज़्ज़ाज़त से

आज फ़ासले मिटाने का वक़्त नहीं ….

 

एतियाद बरत तू हाथ मिलाने से ..

गले लगने का भी अभी वक़्त नहीं…

 

अरे खुद से नज़रबंद हो तू घर के अंदर से ..

महफ़िल में जाने का ये अभी वक़्त नहीं…

 

माना भिड़ जाना फ़ितरत है तेरी मुसीबतों से..

मुसीबत खोजने जाने का अभी ये वक़्त नहीं..

हाँ बाहर घूमने जाने का ये वक़्त नहीं..



 

“पुल के उस पार मिलेंगे”

 

” बेवकूफी से बहादुरी तक पहुँचने में जिस पुल को पार करना होता है उस पुल को कहते हैं समझदारी “

 

अभी घर पे रहो हाँ वो है समझदारी
बाहर निकलना क्यों जान नहीं है प्यारी

 

अपनी नहीं तो बूढ़े माँ बाप की तो सोच,

उनको सुरक्षित रखना,

नहीं है क्या तेरी जिम्मेदारी हाँ ।

 

तेरा तो क्या है वायरस नहीं तो शर्म से मर जायेगा

तेरी बेवकूफी से अगर उन्हें कुछ हो जायेगा ।

 

असल बहादुरी शुरू तब तेरी होगी,

खुद से लड़ने की औकात जब तेरी होगी ।

 

प्यार तो करता है उनसे पर फ़िक्र नहीं ।
दिल में बसाता तो है पर दूरियां बनाता नहीं ।

सुन प्यार छ्दम है तेरा, धोखा है वो , बेवकूफी है

अगर सोशल डिस्टन्सिंग तू अपनाता नहीं ।

 

अरे पुल पार करेगा कैसे, बहादुरी तक पहुंचेगा कैसे,

समझदारी का एक भी कदम जो अब तक उठाया नहीं ।

 

चेहरे पे बार बार हाथ तेरा ये जाता क्यों
क्या इतनी सी बात तेरे भेजे में घुसती नहीं ,
हाथ पे तेरा अगर बस नहीं,

तो हाथों की लकीरें मोड़ना तेरे बस में नहीं

 

नाक सी उंगुली तेरी हटती नहीं
सोने की खुदान है जो रूकती नहीं,
सोना इकट्ठा किया या जर्म्स के जेम्स
अमीर हुआ या बहुत बीमार
बोल! जबान तेरी सच क्यों अब उगलती नहीं ।

 

चल बात न मान मेरी,

पर WHO की भी क्यों सुनता नहीं ।
जो कूल नहीं है

तो Guidelines तू फॉलो करेगा नहीं ।

 

तो तू एक काम  कर

हैबिट्स में अपनी थोड़ा

SWAG मिलाकर फॉलो कर
छींक आये तो

डैप कर पर फॉलो कर
हाथ जोड़कर

या वेव दिखाकर
लोगों सी उचित दूरियां

बनाकर फॉलो कर
Guidelines बस तू फॉलो कर ।

वायरस का मुक़ाबला

कर खूब डटकर
चल फॉलो कर

Guidelines बस तू फॉलो कर ।

 

अगर जीत जाएंगे तो समझदारी के पुल के उस पार मिलेंगे जहाँ बहादुरी का तमगा हमारे सीने में लगने को छटपटा रहा है

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