Child And Pressure To Perform: अंकुरित बीज और उस पर आस का बोझ

Child and Parents’ Pressure to Perform

Most of the time, we have seen in our society that parents pressurize their children to be first in their class, sports, and other activity without any second thought. Parents do comparison frequently without failing any chance and feel inferior to their own children several times without caring for the mental suffering of children. Why parents are so afraid of their failure? If a child does not fail, how can he learn from mistakes? Ankureet beej is that little fellow.

 

अभी तो अंकुरित हुआ है बीज, बनना है इसे तरुवर,

अपने  ज्ञान की समझ से मत कम कर इसके विकास की दर,

माना लगाया है तूने ये बीज, लेकिन समझ ना अपना ये अधिकार,

जब भी मांगेगा तभी मिलजायेगा तुझे फूल, फल, या आहार,

 

पहले अंकुरित बीज को आने दे धरती के बाहर,

ढूंढ़ने दे उसे वो मार्ग, जहाँ दे वो अपनी जड़ें  पसार,

तुलना न कर उसकी किसी और वृक्ष  को निहार,

लेने दे समय  जड़ों को, कर लेने दे हर मार्ग का विहार

 

फ़ैलाने तो दे उसे अपना तना, शाखाये और पत्तियां अपार,

हो जाये एक बार जब फल, फूल देने को तैयार,

तो बिन मांगे ही लेलेना फिर उससे कोई भी उपहार.

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