Attitude Quotes In Hindi

ज़िद्द 1: 

Zidd
Zidd

है अमीरी तो शौक- ऐ- जुनून रख ,

ये ज़िद्द है ही कुछ ऐसी  जनाब

कई दिन और कई रातें खर्च करवाती हैं।  

ज़िद्द 2:

Khoon aur Pasina
Khoon aur Pasina

NEPOTISM हर जगह नहीं चलता BOSS।

ये BODYBUILDING है 

ये तो खून और पसीने में भी अन्तर नहीं करता।  

 

ज़िद्द 3:

शौक रख ज़िद्द बनने तक

और ज़िद्द रख पूरा होने तक।  

ज़िद्द 4:

ये ज़िद्द है कमजोरी को कमजोर करदेने की।  

 

ज़िद्द 5:

अपना बोझ उठाना हर किसी के हाथों के बसकी बात कहाँ।  

 

ज़िद्द 6: दर्द पे दर्ज़ ये मेरी जीत है। 

ज़िद्द 7:

सब्र है नहीं पर फल मीठा चाहिए,

मैगी के इन दीवानों को हर चीज़ दो मिनट में चाहिए।

ये Shredded Body पाने की होड़ है दोस्त,

वक़्त की जेब से दिन, महीना, नहीं

साल खर्च करने की औकात चाहिए।  



 

Attitude Quotes
Attitude Quotes

 

रूठने की वजह तो बता दो

ओ बेवजह रूठने वालों।

ज्यादा ऊँचे पहाड़ों का साथ तो अक्सर पेड भी छोड़ देते हैं ,

कुछ तो कीमत चुकानी पड़ती है ऊँचाइयाँ छूने की।

इन हवाओं को बोलो कि बादलों को यूं मत उड़ाओ

कि आज भीगने का बड़ा मन है।

 

ये खाके जिंदगी में सबकुछ पाने की तलब बड़ी शुमार है,
अरे नासमझ अब किसी मोड़ पे रुक जाना ही बेहतर है।

 

 

मुबारक हो उन्हें सहूलियतों का पिंजरा,
जिन्हें आसमान में उड़ना खतरे से खाली नहीं लगता।

 

एक नन्ही सी कविता ज़हन से निकलकर,
कलम की सीढ़ियों से कागज़ पर उतरती है
बोलती कम है मगर बहुत कुछ कह जाती है।

 

क्षितिज क्या है ?
बस एक प्यास
धरती से आकाश के मिलन की आस।

 

गिरेगा, छटपटायेगा, फिर पंख फैलाएगा,
इस बार तूफ़ान के आगे उड़ने का हुनर आजमाएगा।

 

हर शक्श यहाँ क्या खूब काम करता है
पर अफसोश खुद के लिए कहाँ करता है।

 

अपनी आवारगी से भटकना अब मुमकिन नहीं,
बड़ा संभलके ये रास्ता चुना है मैंने।

 

जीत की कीमत हर कोई कहाँ अदा कर पता है,
हर गरीब हरा हुआ और हर हरा हुआ गरीब नहीं होता।

 

डर है कहीं तुमने अपने गिरेबान में झाँक लिया

तो मेरे सज़दे में रोज़ आयते पढ़ा करोगे.

ऊँचाई अगर किसी मुश्किल की परेशान करें,
तो उसकी गहराई में उतरके देख।

 

आँखों के धनुषों में काजल की प्रत्यन्चा चढ़ाके उसकी तैयारी पूरी है,
बचाना तो दूर पहला आखेट कौन बने दीवानों में ये मारामारी है।

 

उठ, जाग और जी।

 

इत्तेफाक बड़े इत्तेफाक से होते हैं,
और हम इन इत्तेफाक के इंतज़ार में उम्र बिताते हैं।

निकल तो पड़ा हूँ गलतियोँ की राहों पे,

नाकामियाबियों का कारवाँ

अभी पीछे चलना बाकी है,

ये जिंदगी बीरबल की खिचड़ी है जनाब,

इसे चखना अभी बाकी है।

 


सूरज में खुद को देखता : मैं

अभी तो उदय हुआ हूँ , तपिस पानी अभी बाकी है।

झुलस जाये ये पूरा जग, कीर्ति की किरणे ऐसी फैलानी अभी बाकी है।

जानता हूँ, सफलता की शाम आएगी एक दिन,

पर उस शाम में सफलता की गर्मी महसुस करनी अभी बाकी है।

पानी से भी  न बूझे, भीतर वो आग जलानी अभी बाकी है।

सोया हूँ पर, जगाके रखने वाला अहसास आना अभी बाकी है।

जब सूरज पूछे उगने का तरीका, वो मक़ाम बनाना अभी बाकी है।

अभी तो उदय हुआ हूँ , तपिस पानी अभी बाकी है।


शेरों की गर्जना

सुन शेरों की गर्जना, नहीं भाग्य से कोई अर्चना।

विपदाओं के सागर में अब है मुझे कूदना

उमीदों के सीप गहराइयों में जाके ढूंढ़ना

असफलताओं के तीरों को सीधे सीने में लेना,

याद रहे की कितनी दूर और है निकलना

नहीं जनता दिखती कैसी है वो सफलता राजकुमारी

पर जनता हूँ कहीं तड़प रही होगी वो मेरे इन्तजार की मारी।


जीवन युद्ध

अब उठ तुझे युद्ध करना है ,

अपनी  असफलताओं से तुझे खुद ही लड़ना है,

जितना है मन में रख यही आस,

मत सोच, कहाँ मिला कोई अधिकार ख़ास

अरे युद्ध में कहाँ कवच कुण्डल काम आया

केवल अपने पौरुष  से ही वीरों ने नाम कमाया.

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