Abhimanyu: Hindi Poem

Abhimanyu: Hindi Poem, is about a warrior from Mahabharta. People see him as a warrior but the poem says that he is more than just a warrior. He is a footprint maker who shows the new path to followers.

Abhimanyu: Hindi Poem

खेल आज षड़यंत्र, नीयति ने कुछ ऐसा कर डाला।

अर्जुन को दूर भेज Chakravyu (चक्रवयूह) ही रच डाला।

 

उतारना सही होगा

Chakravyu (चक्रवयूह) में रथ,

जीतेंगे क्या ? कभी गए नहीं जिस पथ

 

देखकर अनजानी राहें अक्सर लौट जातें हैं कई वीरों के वीर ,

पर चक्रवयूह भेदन की अनजानी राह पर निकलता है केवल Abhimanyu (अभिमन्यु) शूरवीर।

 

आसान नहीं है डगर, मगर किसी न किसी को तो बनाने होंगे पदचिन्ह,

चलकर जिसपर लोग बन पायेंगे साधारण से भिन्न।

 

हौसला दिलाने को कह तो दिया

माँ के पेट से सीख के लाया हूँ।,

तभी तो अर्जुन पुत्र, Abhimanyu (अभिमन्यु) कहलाया हूँ।

 

डर है , घबराहट भी 

पर नीयति के षड़यंत्र को मिटाने की चरमराहट भी .

 

पद्चिन्ह बनाने वालों पर कब नीयति मेहरबान रही,

महारथियों  के बीच फँसाकर, Abhimanyu (अभिमन्यु) को डरा रही।

 

निहत्था कर देगी, अकेला कर देगी,

ये नीयति बड़ी क्रूर है,

अत्याचार ही इसका इकलौता  व्यापार है।

पर इसे हराने का Abhimanyu (अभिमन्यु), कुछ अपना अलग ही गुरुर है।

 

बीता कल बदल दे, माना तुझमें इतनी शक्ति  नहीं ,

पर आने वाला कल न बदल दे इतना भी तू लाचार नहीं।

 

असफलताओं को बोझ न बना, सर पे रख

सीढ़ी बनाते बस चढ़ते जा, इसे पैरों में रख

 

नीयति का पहिया तेरे ही हाथों घूमेगा

तू उठ, Chakravyu (चक्रवयूह) तोड़, पद्चिन्ह बना

सारा विश्व तेरी ही अमर गुणगान पे  झूमेगा।

 

We are living in the age where we all have so many potentials, desire to achieve anything with our hard work. But we guys are in competition with the best on limited resources, so it is the right time to be Abhimanyu and look for other alternative resources to create new footprints. Through our Hindi poems, we try to make you remember how we used to live. PahadNama is our such effort to make footprints.

 

 

 

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