हाँ सो रहा हूँ मैं

हाँ सो रहा हूँ मैं | हिंदी कविता |

हाँ सो रहा हूँ मैं | हिंदी कविता | कभी कभी सोया रहने का मतलब है। अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने की कोशिश तक नहीं करना। सभी को पता है ऐसे में व्यक्ति का विकास रुक सा जाता है। ये कविता उसी के बारे में है।

 

यहाँ देखिये : PahadNama 

हाँ सो रहा हूँ मैं | हिंदी कविता |

हाँ सो रहा हूँ मैं,

लापरवाही की चादर लिये हुये,

बेफिक्री का आरामदायक बिछौना बिछाये हुए।

मेहनत से डरकर, छुपकर

सो रहा हूँ मैं।

 

अपने सपनो की

तरफ कदम न बढ़ाना,

समय की है कमी,

कहकर शुतुरगमुर्ग की तरह

सिर रेत में घुसा कर सोया हूँ मैं.

 

सवाल जब खुद से पूछे

कि काम क्यों न हुए ये पूरे,

हमेशा रहतें हैं बहाने पास मेरे

शायद तभी काम रह जातें हैं अधूरे।

 

बहानों के पर्दे

मेरी आँखों में उतर आयें  हैं,

इन्हीं पर्दों के पीछे

सो रहा हूँ मैं।

हाँ सो रहा हूँ मैं

आलस्य: एक जीवन शैली | हिंदी कविता |

 

आलसी नहीं मैं बस, पलट- पलट के सोने का मजा ही कुछ और है।

पांच मिनट के लिए सोता हूँ, पर दो घंटे बाद जागता हूँ।

ऑफिस की एक घंटे की दूरी , कूदते-फाँदते पैंतालीस मिनट में पूरी कर लेता हूँ।

आलसी नहीं मैं बस, पलट- पलट के सोने का मजा ही कुछ और है।

लोग कहते हैं की कमरा मेरा बड़ा अस्त-व्यस्त है,

आलसी तू इतना की कुम्भकर्ण भी तेरे आगे पस्त है।

 

यहाँ पढ़िए : आलस्य: एक जीवन शैली

 

Neend Shayari | Hindi Quotes |हिंदी कविता |

नींद शायरी | कविता | कोट्स | में आप नींद के बारे में कुछ कवितायें या चंद पंक्तियाँ पढ़ते हैं। नींद से हम सभी का एक अपना अपना रिश्ता होता है। यूँ तो वैज्ञानिक सही नींद के कई फायदे बतातें हैं। पर ज़िन्दगी में हर किसी के नसीब में अच्छी नींद कहाँ।

 

“इश्क मिला है coffee में या caffeine घुला है इश्क में,

 इत्तफाक नहीं आंखों से नींद का यो नाराज हो जाना

रात भर बस ये करवटें हैं

इस राज की सिलवटें सुलझाने को ,

कि इश्क है या coffee

या

किसी विचार का रात भर मच्छर की  तरह भिनभिनाना ।

 

यहाँ पढ़िए : Neend Shayari

 

 

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2 thoughts on “हाँ सो रहा हूँ मैं | हिंदी कविता |

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