सुखदेव और बाली | Hindi Story

 सुखदेव और बाली is a Hindi Story in Kagaj Kalam narrated by Bhumika Joshi. A story about two friends wherein they convinced their teacher for equal rights of education for all. 

Hindi Stories By Kagaj Kalam

 सुखदेव और बाली | Hindi Story

एक बार की बात है दो मित्र हुआ करते थे सुखदेव और बाली, दोनों ही काफ़ी अच्छे मित्र थे। सुखदेव और बाली अब धीरे-धीरे बड़े हो रहे थे अब उनका गुरुकुल में जाकर शिक्षा लेने का समय आ गया था। बाली ‌कहता है मित्र अब तो हम साथ में शिक्षा ग्रहण करने जा रहे हैं कितना आनंद आएगा। सुखदेव कहता है मित्र मैं तो शिक्षा ग्रहण कर सकता हूं मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है परंतु तुम शिक्षा ग्रहण कैसे कर सकते हो। बाली कहता है मैं क्यों नहीं कर सकता शिक्षा ग्रहण मित्र। सुखदेव कहता है कि तुमको गुरुकुल के नियम कायदे कानून नहीं मालूम क्या वहां पर सिर्फ़ ब्राह्मण जाति के लोगों को शिक्षा मिलती है और तुम तो ब्राह्मण जाति के हो ही नहीं। बाली कहता है यह  भेदभाव क्यों?

PahadNama: YouTube

बरसों की रीत

सुखदेव कहता है यह तो बरसों की रीत है मित्र सभी को निभाना अनिवार्य है और जो नहीं निभाता व अधर्म कर बैठता है, तुम्हें मालूम नहीं क्या ब्राह्मण जाति और नीची जाति के लोग आपस में बात तो क्या एक दूसरे को देखते भी नहीं है। बाली कहता है अच्छा  मतलब तुमने तो बहुत बड़ा अधर्म ‌कर दिया है। सुखदेव कहता है वह कैसे मित्र? बाली कहता है तुम एक ब्राह्मण श्रेणी के होते हुए भी मुझसे मित्रता रखते हो मेरे साथ रहते हो मेरी मदद करते हो यहां तक कि तुमने मेरे घर का भोजन तक खाया है। सुखदेव कहता है तुम जैसा मित्र पाना मेरे लिए गर्व की बात है तुम भी मेरे साथ मेरी परेशानी में  रहते हो, तुमने अपनी जान जोख़िम में डालकर मेरे माता-पिता की जान बचाई थी, तुम बिना किसी लालच के भला करना जानते हो।

गुरुकुल, सुखदेव और बाली

तुम मेरे लिए बेहद अनमोल हो मित्र। बाली कहता है तो ठीक है अगर मित्र कहते हो तो कल मुझे गुरुकुल में आने से नहीं रोकोगे। सुखदेव कहता है वह तो ठीक है मित्र परंतु तुमको वहां सब पहचान नहीं लेंगे। बाली कहता है जब तक कोई अपना मुख ना खोले तब तक मेरा सत्य बाहर नहीं आ सकता। सुखदेव कहता है तुम करने क्या वाले हो मित्र?। बाली कहता है कल सवेरे तक इंतजार करो बस ,सुखदेव कहता  है तुम्हारी जैसी इच्छा मित्र।

सवेरा हो जाता है सुखदेव बाली का काफ़ी इंतजार करता है पर बाली नहीं आता तब सुखदेव सोचता है क्या पता मित्र के माता-पिता ने उसे यह सब करने से मना कर दिया हो। सुखदेव वहां से अकेले गुरुकुल की तरफ़ चल पड़ता है जैसे ही सुखदेव पहुंचता है उसके कुछ समय पश्चात बाली भी गुरुकुल  में आ जाता है।

सुखदेव बाली को देखकर काफ़ी ख़ुश होता है, वह देखता है बाली ने ब्राह्मण का वेश धारण किया हुआ है। बाली सुखदेव से कहता है देखा मित्र मुझे शिक्षा ग्रहण करने से यह जाति भी नहीं रोक पाई अब हम अपने नए मित्र बनाएंगे और शिक्षा ग्रहण करेंगे।

सुखदेव कहता है मित्र तुम काफ़ी तेज हो पर ध्यान रखना यह किसी को तुम्हारा सत्य‌ पता ना लग पाए। दोनों मित्र बाली और सुखदेव अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे शिक्षा ग्रहण करते कुछ समय बीत चुका होता है। गुरुकुल में सबसे प्रिय शिष्य बाली को कहते थे।

गुरु का गुस्सा‌

परंतु अचानक एक दिन बाली के पिताजी गुरुकुल आते हैं उन्हें देखकर गुरु काफ़ी गुस्सा‌ होते हैं और कहते हैं मुर्ख तुमने इस पवित्र स्थान पर अपने पैर रखने की जुर्रत कैसे करी। बाली के पिता जी किशोर कहते हैं गुरुदेव मुझे माफ़ करिए परंतु मैं अपने पुत्र को लेने आया हूं । गुरुदेव काफ़ी तेज़ स्वर में कहते हैं इस किशोर का पुत्र कौन है?। बाली कहता है गुरुदेव मैं हूं इनका पुत्र। गुरुदेव काफ़ी गुस्से में होते हैं और कहते हैं तुमने इतना बड़ा पाप खुद तो करा और मुझे भी इस पाप का भागीदार बना दिया। बाली कहता है कैसा है पाप गुरुदेव।गुरुदेव कहते हैं तुम् ब्राह्मण श्रेणी में नहीं आते हो और फिर भी शिक्षा ग्रहण करने का साहस करा। बाली कहता है गुरुदेव मुझे माफ़ कीजिए परंतु मुझे शिक्षा ग्रहण करनी थी और मेरी जाति मेरी बाधा बन रही थी। गुरुदेव कहते हैं तुम एक नीची जाति के मनुष्य हो तुम्हें शिक्षा ग्रहण करने का हक़ ही नहीं है।

बाली कहता है पर क्यों गुरुदेव? वे कहते हैं मूर्ख तुम ब्राह्मण नहीं हो। बाली कहता है सिर्फ़ मेरा ब्राह्मण ना होने से मुझे शिक्षा का हक नहीं है यह तो अन्याय है गुरुवर। गुरुदेव कहते हैं यह तुम्हारे कर्म है जो तुम नीची जाति में पैदा हुए हो और अब यहां से निकल जाओ।

प्रश्नों का जवाब

बाली कहता है आप मेरे गुरु हो आपका आदेश सर आंखों पर परंतु आप मेरे कुछ प्रश्नों का जवाब दे दीजिए इसके पश्चात मैं निकल जाऊंगा।

गुरुदेव बाली को काफ़ी प्रिय मानते थे इसलिए उन्होंने बाली को प्रश्न पूछने की अनुमति दे दी। बाली पूछता है गुरुदेव आप ब्राह्मण हो तो ब्राह्मण की श्रेणी किस तरह से हम से अलग है?। गुरुदेव कहते हैं हम शिक्षित हैं ज्ञानी है संसार को अपने ज्ञान से उज्जवल करने का कार्य हम करते हैं। बाली कहता है गुरुवर अगर हमारी श्रेणी वाले लोग ‌भी शिक्षित होते तो वे भी संसार को उज्जवल बनाने में अपना योगदान देते , गुरुवर हमने यह जाति धर्म इंसान की सुविधा के लिए बनाया था पर अब यही सबसे बड़ी दुविधा का कारण बन गया हमारे लिए ,हम चाहें तो इसे ख़त्म कर सकते हैं। गुरुदेव कहते हैं तुम इससे ईश्वर का अपमान कर रहे हो हम ब्राह्मण ईश्वर की भक्ति में बहुत मानते हैं। बाली कहता है गुरुदेव ईश्वर की भक्ति हम भी करते हैं आपका और मेरा ईश्वर अलग नहीं है और अगर उन्होंने जाति धर्म  का निर्माण करा होता ना‌ तो वह  ऊपर से ही हर मनुष्य में निशानी लगा कर भेजते जिससे हमें यह पता चल पाए कि वह मनुष्य किस श्रेणी का है। परंतु ईश्वर ने ऐसा कुछ करा ही नहीं है आप मैं हम दोनों ही शारीरिक तौर पर समान है ज्ञान में भी समान हो जाएंगे अगर श्रेणी भूली जा सके तो। यह सब सुनकर किशोर बाली पर हाथ उठाता है परंतु गुरुदेव उसे रोकते हैं और कहते हैं मैं तुम्हारे विचारों से काफ़ी प्रभावित हुआ हूं और इसी कारण तुम मेरे आज भी और हमेशा प्रिय शिष्य रहोंगे।

शिक्षा लेने का समान अधिकार

गुरुदेव उसी समय ऐलान करते हैं कि अब गुरुकुल में हर मनुष्य का समान अधिकार है शिक्षा लेने का, अब किसी भी मनुष्य को जाति धर्म का भेदभाव नहीं सहना पड़ेगा हम मनुष्य है हम को सबसे पहले दूसरे के प्रति प्रेम की भावना होनी चाहिए और यह हमारा कर्तव्य है जो कि मैं इस बालक से सीख पाया। इतना कहकर सब ख़ुश हो जाते हैं अब बाली अपनी शिक्षा गुरुकुल में ही पूर्ण करता है और अब गुरुकुल में समानता एवं श्रेणी जैसे विषयों पर भी ज्ञान दिया जाता है जिससे आगे चलकर कोई मुश्किल ना आ पाए।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *