वो बेपरवाह हँसी: A Hindi Poem

वो बेपरवाह हँसी: A Hindi Poem. She is carrying so much joy, pain, love, in her shy smile. Yeah she is super annoying at this time and peak on her tantrum but this is the way she is in her pregnancy. वो बेपरवाह हँसी, शर्मीली मुस्कुराहट में बदलने लगी is A Hindi Poem of her becoming pregnant. Find the video here. 

वो बेपरवाह हँसी, शर्मीली मुस्कुराहट में बदलने लगी: A Hindi Poem

वो बेपरवाह हँसी, शर्मीली मुस्कुराहट में बदलने लगी ,
खूबसूरत से वो और भी ख़ूबसूरत होने लगी।
पर मेरे कन्धों से कन्धा मिलाकर चलने वाली कुछ दूर चलने पर ही अब थकने लगी।
जब पूछूं क्या हुआ ?
तो वो वो बेपरवाह हँसी, शर्मीली मुस्कुराहट में बदलने लगी ।

ज़िद्दी थी अब और भी ज़िद्दी होने लगी,
एक पल खाने की ज़िद्द दूजे पल ही ठुकराने लगी,
मुझे सताने के नए और नए बहन्दे ढूंढ़ने लगी,
जब पूछूं क्या हुआ ?
तो वो वो बेपरवाह हँसी, शर्मीली मुस्कुराहट में बदलने लगी।

वो मजबूत इरादों वाली , शरीर टूटने की शिकायत करने लगी,
घर ऑफिस का बोझ उठाने वाली अपने शरीर को पैरों पर बोझ बताने लगी,
लड़ती – झगड़ती वो लड़की, मेरे कंधो को ही तकिया समझ सोने लगी ,
जब पूछूं क्या हुआ ?
तो वो वो बेपरवाह हँसी, शर्मीली मुस्कुराहट में बदलने लगी।

कुछ तो है तो ये चंचल लड़की कुछ कुछ और बदलने लगी
हर घंटे के लिए अलग अलग मूड रखने लगी
कभी गुस्सा, कभी चिढ़ना, तो कभी ज़िद्द न जाने क्या क्या रंग दिखने लगी,
जब पूछूं क्या हुआ ?
तो वो वो बेपरवाह हँसी, शर्मीली मुस्कुराहट में बदलने लगी।

“पैर हैं जड़ थोड़ी न ” कहने वाली अब एक जगह ज्यादा बैठने लगी
थोड़ी – थोड़ी या थोड़ी से ज्यादा मोटी दिखने लगी ,
मेरे सर को अपने पेट पर रखकर “कुछ सुना कुछ सुना ” ऐसा कुछ कहने लगी।
शायद शायद वो माँ—– माँ बनने लगी
जब पूछूं सच है क्या ?
तो वो वो बेपरवाह हँसी, शर्मीली मुस्कुराहट में बदलने लगी।

 

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