मेरी आस्था Hindi Story

मेरी आस्था Hindi Story is written by Bhumika Joshi. Her experience with belief. She wonderfully put her words in the story. Read and enjoy.

मेरी आस्था Hindi Story

एक बार की बात है एक गांव में दो भाई रहते थे अमन रमन दोनों भाई जुड़वा थे, दोनों भाई एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे बेहद मानते थे। उनके पिताजी बहुत बड़े पंडित थे  पूरे गांव में उनके पिताजी को हर कोई जानता था पिताजी पंडित होने के कारण अमन रमन को बचपन से ही भक्ति सागर में लगा रखा था‌, उनके पिताजी ने उन्हें बचपन से ही ईश्वर में आस्था रखने की सीख दी हुई थी ,वह उनसे हर समय कहते थे अगर ईश्वर में है आस्था तो मुश्किलों में भी है रास्ता।

ऐसे करते करते दोनों बच्चे बड़े हो गए थे। पहली बार अमन रमन अपनी जिंदगी में एक बड़ी परीक्षा देने जा रहे थे  और इसके लिए उनको काफी मेहनत की जरूरत थी तो इस परीक्षा को पार करने के लिए दोनों पूरी मेहनत करने लग गए थे।

पिताजी अपने पुत्रों की मेहनत देखकर काफी प्रसन्न थे अचानक से 1 दिन कुछ ऐसा हुआ जिस वजह से दोनों पुत्रों की जिंदगी में बहुत बड़ा बदलाव आ गया।

मेरी आस्था | Hindi Story: बड़ा बदलाव 

आजकल पिताजी देख रहे थे कि अमन भक्ति में ज्यादा लीन नहीं होता मतलब अपना पढ़ने में लगा रहता है सिर्फ आधा घंटा हमारे साथ बैठता है मंदिर में और फिर ‌चले जाता है . पिताजी ‌ इस बात से नाराज थे तो उन्होंने अमन से सीधा जाकर बोला कि बेटा तुम यह क्या कर रहे हो तुम्हें पता नहीं है कि ईश्वर के कारण ही तो हम हैं और तुम ईश्वर को सिर्फ आधा घंटा दे रहे हो , अमन बोलता है  पिताजी मुझे माफ़ करिए पर अभी मेरी परीक्षाएं हैं इसीलिए मैं इतना ही समय निकाल पा रहा हूं , पिताजी गुस्से से कहते हैं कि ईश्वर ने हमारा साथ आज तक नहीं छोड़ा तो तुम ईश्वर का साथ ऐसे कैसे छोड़ सकते हो अमन कहता है पिताजी मेरे को आज भी ईश्वर में आस्था है और हमेशा रहेगी पर अभी मेरी परीक्षाएं है जिसके लिए मुझे कड़ी मेहनत की जरूरत है इसलिए मैं ज्यादा समय नहीं निकाल पा रहा हूं मुझे समझने की कोशिश करिए पिताजी। यह बात सुनकर पिताजी को बेहद गुस्सा आता है और गुस्से में अमन से बोलते हैं अमन तू यह सब छोड़ रहा  है या नहीं अमन भी बोल देता है पिताजी अभी मेरा समय  मेहनत करने ‌का  है तो मैं यह चीज को कैसे छोड़ सकता हूं । पिताजी कहते हैं अमन तू नास्तिक बन गया है बचपन में कैसा था और अब देख कैसा हो गया तू देख लियो तू इस परीक्षा में पास ही नहीं हो पाएगा क्योंकि तू तो एक नास्तिक बन चुका है और मैं अपने घर में किसी नास्तिक को नहीं रहने दे सकता यह बोलते ही अमन के पिताजी अमन को घर से निकाल देते हैं और कहते हैं जा कर लें परीक्षा की तैयारी । अमन काफी मीठे स्वर में कहता है कि पिताजी मैं परीक्षा की तैयारी जरूर करूंगा पर आप अपना और रमन का ध्यान रखना इतना कहकर अमन वहां से चले जाता है , अमन के पास इतने पैसे तो थे कि वह एक किराए का छोटा सा कमरा ले सके और उसने उस किराए के कमरे में रहते रहते अपनी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी ।

पिताजी दुखी थे और गुस्से में भी थे उनको अमन का व्यवहार बिल्कुल पसंद नहीं आया और ईश्वर के सामने अमन की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करने लग गए।

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मेरी आस्था | Hindi Story: क्या पढ़ना ?

जब से अमन को घर से निकाला था तब से रमन का भी पढ़ने में दिल नहीं लग रहा था उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था क्या पढ़ना? कैसे पढ़ना? अमन ने कितना पढ़ लिया होगा अमन ने क्या क्या पढ़ लिया होगा इसी तरह के सवालों के बारे में वह पूरा दिन सोचता रहता था। इस समय रमन  काफी मुश्किल में था और इस मुश्किल की घड़ी में रमन को अपने पिताजी की एक बात याद आई उसके पिताजी अक्सर  कहा करते थे अगर ईश्वर में है आस्था तो मुश्किलों में भी है रास्ता और इसके बाद रमन सीधा अपने घर के मंदिर में गया ईश्वर के सामने बैठ गया और बोलने लगा हे ईश्वर मेरी मदद करो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं कैसे करूं इतना सब बोलने के बाद भी कुछ घंटे मंदिर में बैठा और फिर वहां से अपने कमरे में पढ़ने के लिए चला गया रमन रोज एक-दो घंटे ईश्वर के सामने बैठता यही बातें दोहराता था और फिर अपने कक्ष में पढ़ने चले जाता रमन अब काफी खुश था और उसने अपने पिताजी को कहा पिताजी आप सही कहते थे ईश्वर की भक्ति में ही सब कुछ है इसके बाद रमन को पूरा दिन मंदिर में बैठे रहने की आदत पड़ गई पहले वह 5 घंटे पढ़ लिया करता था पर अब तो पूरा दिन भर मंदिर में ही बैठा रहा करता था और यह सब वह इस वजह से कर रहा था क्योंकि उसको लग रहा था कि पहले मैं भगवान के सामने एक-दो घंटे बैठा करता था और तब मुझे इतना समझ आने लग गया था पढ़ाई में और सोचो अगर मैं भगवान के सामने पूरा दिन रात भर बैठा रहूंगा तो मैं आसानी से पास हो जाऊंगा‌ ।‌ पिताजी को यह सब देख कर बहुत खुशी हो रही थी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि रमन सही रास्ते पर चल रहा है पर यह सच नहीं था। 

मेरी आस्था : रिजल्ट का दिन

ऐसे करते-करते परीक्षा का दिन आ गया पिताजी ने बचपन से ही अमन रमन को एक बात बताइए कि  जब तुम कोई भी परीक्षा देने जाते हो तो उससे पहले शिवलिंग पर दूध चढ़ा दिया करो तब रमन और उसके पिताजी पास के मंदिर में शिवलिंग पर दूध चढ़ाने चले गए थे वहां पर उन्होंने अमन को देखा वह भी दूध चढ़ाने आया था यह देखकर पिताजी के चेहरे पर मुस्कान आई पर अगले ही पल उनको गुस्सा आ गया क्योंकि अमन के पास एक छोटी सी लड़की आई और वह शिवलिंग पर जो दूध चढ़ाने वाला था उससे वह दूध मांग रही थी और अमन ने अपने पिताजी को देखा पिताजी शिवलिंग को देख रहे थे और ऐसे ही देखते ही देखते अमन ने वह दूध उस छोटी सी बच्ची को दे दिया। यह देखकर पिताजी रमन को लेकर वहां से चले गए दोनों भाई परीक्षा देकर आ चुके थे रमन और उसके पिताजी बहुत खुश थे  क्योंकि उनको मालूम था ईश्वर मेरे बेटे रमन के साथ है।अब रिजल्ट का दिन आ चुका था और रमन एक नंबर से फेल हो गया था और अमन बहुत अच्छे अंको से पास हो चुका था । यह बात रमन के पिताजी को गलत लगी दोनों निराश थे और निराशाजनक चेहरा लेकर घर को लौट रहे थे तभी रास्ते में उनको एक साधु मिलता है साधू उनसे पूछता है कि तुम निराश क्यों हो? रमन के पिताजी पूरी बात बताते हैं और कहते हैं भगवान ने हमारे साथ न्याय नहीं किया। साधु कहता है हे मूर्ख तुझे पता नहीं ईश्वर ने एकदम न्याय ही क्या है तुम लोगों के साथ । तुम्हारे बेटे अमन ने कड़ी मेहनत करी लगातार अभ्यास करा और उसको उसका फल मिला और तुम्हारा दूसरा बेटा रमन सिर्फ भगवान की भक्ति में ही लगा रहा । 

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मेरी आस्था: आप मुझे वापस जरूर बुलाओगे

साधु कहता है देखो पुत्र जब हमको कोई यात्रा करनी  होती है तब हम ईश्वर से कहते हैं कि हम को सकुशल पहुंचा देना पर चलना तो हमें खुद ही पड़ता है ना अपने पैरों से इसका मतलब यह थोड़ी ना है कि ईश्वर हमें  गोद में उठाकर हमारी मंजिल तक छोड़ेगा। गीता के श्लोक सिर्फ अभ्यास करने से याद होते हैं ना कि ईश्वर के सामने बैठने से , ईश्वर तुम्हें इस परीक्षा के समय में तुम्हारी हिम्मत बन सकता था जब तुम कमजोर पड़ते तब तुम्हारा हौसला बनता पर तुम तो पूरा दिन ही मंदिर में बैठकर ईश्वर का जाप करने लग गए। ईश्वर भी मदद तभी करता है जब सामने वाले में हिम्मत हो मेहनत करने की लगन हो । और इसी वजह से तुम्हारा एक पुत्र आज आगे बढ़ चुका है अभी भी मेहनत करना चाहो तो कर सकते हो बस डरना नहीं और जितनी जल्दी हो सके अपने दूसरे पुत्र को वापस घर बुलाओ।

यह सब सुनने के बाद पिताजी अमन को दोबारा घर ले आते हैं अमन बहुत खुश होता है वे अपने पिता जी के चरण स्पर्श करता है और कहता है मुझे विश्वास था कि किसी ना किसी दिन आप मुझे वापस जरूर बुलाओगे।

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