बारिश का मौसम | Hindi Poem

बारिश का मौसम a Hindi poem by Kagaj Kalam. Sometimes you don’t have anything to do. you are just sitting on your chair, looking raining, hearing its sound, and realizing how far we have come from our beloved ones without going so far.

PahadNama: A collection of my Hindi poems

बारिश का मौसम

baarish ka mausam

Barish ka Mausam

Man-soon has been special for me always. It comes with so much realization that is hard to think of in ordinary days along with greenery, rain, and shouting clouds. It gives me chance to redefine different aspects of my life whether it is love, relation, myself, and others. This Hindi poem by Kagaj Kalam is an effort of finding a new definition of warmth in lost relation.

जुलाई का महीना,

बारिश का मौसम,

पानी की झमझमाहट,

और बरामदे में ऊंघ रहे कुछ उदासीन रिश्ते।

 

दो कदम की दुरी,

पर मीलों का फासला ,

फासला जो एक पहल से पार हो जाए ,

पहल जो रिश्तों को रूह तक भिगो जाए।

 

पर आसान कहाँ है पहल करना,

घमण्ड की दीवार को लाँघना।

 

क्या जरुरी है इंतज़ार ?

कि कोई बादल फटे, घमण्ड की दीवार ढहाने को ।।

पहाड़ में बारिश का मौसम

सावधानी बरतने का मौसम,

पहाड़ में बारिश का मौसम ।।

 

बादलों की उमड़ घुमड़ का मौसम,

दौड़ते बादलों की पहाड़ छूने की ज़िद्द देखने का मौसम
चाय की चुस्कियों के साथ, नज़ारों का लुफ्त उठाने का मौसम
पर सैर सपाटे की तीव्र चाह को अनदेखा करने का मौसम

 

सावधानी ——–

———- मौसम ।।

 

अपने अन्दर के मौसम से मिलने का मौसम,
घर पर बैठ कुछ रचनात्मक करने का मौसम
वाहन, सड़कों, पहाड़ को आराम देने का मौसम,
घूमने के लिए असुरक्षित है ये मौसम

 

सावधानी ——–

———- मौसम ।।

 

प्रकृति का तन पर हरियाली ओढ़, हमे लुभाने का मौसम
खूबसूरती और ख़ौफ के मिश्रित मंज़रों का मौसम
चट्टानों के गिरने का मौसम
मिट्टी- पत्थरों के ढहने का मौसम
बादल फटने का मौसम
नदियों के विकराल रूप का मौसम

 

सावधानी ——–

———- मौसम ।।

 

व्यवस्था की समीक्षा करता ये मौसम,
सड़कों, पुलों , घरों की मजबूती की परीक्षा लेता ये मौसम
कई जानों से खेलता ये मौसम
पहाड़ की खूबसूरती पर एक बदनुमा दाग उजागर करता ये मौसम

 

सावधानी बरतने का मौसम,

पहाड़ में बारिश का मौसम ।।

Quotes of Baarish:

” बनके मुसलाधार बारिश कभी तू रूठ के बरस तो सही

सीने में  उतने ही अन्दर उतरती चली जाएगी मैं प्यासा मरुस्थल हूँ वही”

 

” तुम्हे बारिश को कोड़ते सुना तो सोचा पूछ लूँ।

कौन है वो जिसके लिए रूह तक भीगे हो बारिश में ?”

 

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