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पहाड़ बोला पहाड़ियों से Hindi Kavita
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पहाड़ बोला पहाड़ियों से : Hindi Kavita

पहाड़ बोला पहाड़ियों से : Hindi Kavita by Kagaj Kalam is showing the palayan of Pahad. If pahad is a living person, it definitely would have something to complain. This Hindi poem is one of them. To listen the Hindi Kavita, you can visit the PahadNama, YouTube channel or just simply click here.

पहाड़ बोला पहाड़ियों से : Hindi Kavita

Read Famous poem in Hindi

” पहाड़ बोला पहाड़ियों से 

बेटा सीधा हूँ सख्त हूँ, तभी तो अपनों से विरक्त हूँ। 

कुछ जा चुके छोड़के, तुम भी चले जाना मुँह मोड़के। 

 

हो सके तो मेरा सीधापन यहीं छोड़ देना 

पर इन टेढ़े- मेढे रास्तों से जरूर कुछ सीख लेना। 

बेच खायेगी ये दुनिया बड़ी चालाक है, 

हमेशा रहती इसे लाटों की तलाश है। 

 

बुरे नहीं वो बस हालात से मजबूर हैं 

अपना घर छोड़के,

कुछ कर गुजरने  की खुमारी उनमें भी शूमार है। 

 

माना गरीब हूँ 

खाने के लिए पीजा -बर्गर, कमाने के लिए नौकरी,

आने जाने  के लिए सुगम रास्ते, 

पढ़ने के लिए हाई- फाई सकूल नहीं दे सकता तो क्या। 

 

कभी जो टेन्शन सताये,

साँस लेने में दिक्क्त आये या खुद को ढूंढ़ने को जी मचलाये 

तो चले आना, बस तुम वापस चले आना। 

 

पर हाँ वो शहर का टेढ़ापन, इन टेढ़े – मेढे रास्तों में ही छोड़ आना 

मुझे बस यूँ ही सीधा और सख्त बने रहने देना। “

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