न मैं तुझसे कुछ ज्यादा न तू मुझसे कुछ कम रहे: A Hindi Poem

न मैं तुझसे कुछ ज्यादा न तू मुझसे कुछ कम रहे, a Hindi poem tells how a relationship works just by understanding and appreciating the roles of each other also promotes gender equality.

Gender equality is necessary for the foundation of prosperous and peaceful world. For sure, over the last decades, people are started talking about it more, we can see more girls in the school, parliament, army, doctor, and other leadership roles. we are living in better world today but there are a lot of to do. Let’s not get into big things lets start from relationship of husband and wife.

Patriarchal society has defined some rules for women and men. Maybe these rules would be helpful for sustainable society but now these seem old fashioned. Not only women and their feelings are suppressed from it but also men having issues with those patriarchal rules.

A Hindi poem is an effort to break those archaic rules and anchor gender equality. To watch the video visit PahadNama.

न मैं तुझसे कुछ ज्यादा न तू मुझसे कुछ कम रहे: A Hindi Poem

A Hindi poem compels you to think about the gender equality is the key of a successful relationship. Enjoy other Hindi Kavita here.  But first get an another side of opinion on gender equality as a Hindi poem.

 

न मैं तुझसे कुछ ज्यादा न तू मुझसे कुछ कम रहे।

मैं तेरी रूह में झांकता रहूं

तू भी मेरा मन टटोलती रहे

आँखों में तेरी अपना इंतज़ार देखूं

और मेरे हाथो की चाय भी थकान तेरी मिटाती रहे।

 

न मैं तुझसे कुछ ज्यादा न तू मुझसे कुछ कम रहे।

 

रोटी बेलु मैं तो सेखे तू और
गर्मागर्म रिश्ते परोसे जाएँ।

बर्तन मांझु मैं तो धुले तू और
बर्तन में भी रिश्तों की चमक नज़र आये।

 

न मैं तुझसे कुछ ज्यादा न तू मुझसे कुछ कम रहे।

 

लाज़मी है की फ़िक्र करें पर
फ़िक्र मेरे पंखों और तेरी उड़ानों पर पहरे न रहे।

तेरे पीछे बैठने का ,
मेरे अंदर के मर्द को कोई दर्द न रहे।

 

न मैं तुझसे कुछ ज्यादा न तू मुझसे कुछ कम रहे।

 

हो जगह ऐसी की कुछ भी न हो छिपाने को पर
साथ एक – दूजे के प्राइवेसी भी जगह पाती रहे।

 

न मैं तुझसे कुछ ज्यादा न तू मुझसे कुछ कम रहे।

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