नयन का फ़ोन | Hindi Story |

नयन का फ़ोन is a Hindi story in Kagaj Kalam narrated by Bhumika Joshi. Today’s story is a family story that learn the family emotions. 

PahadNama

नयन का फ़ोन | Hindi Story

एक परिवार था जिसमें पति पत्नी और उनकी तीन बेटियां रहती थी। बेटियों का नाम नीलम निशा नयन था। तीनों बेटियां पढ़ने में काफ़ी होशियार थी।

Kagaj Kalam

दयाराम का मित्र

एक बार क्या हुआ दयाराम अपने घर को लौट रहा था लौटते समय रास्ते में उसको अपना एक पुराना मित्र मिला दयाराम काफ़ी खुश हुआ अपने मित्र से मिलकर उसने अपने मित्र से कहा कि हम कितने सालों बाद अचानक मिल रहे हैं। अब दोनों आपस में बात कर रहे होते हैं एक दूसरे के परिवार के बारे में पूछते हैं दयाराम का मित्र कहता है मेरे परिवार का तो हाल ही मत पूछो मेरे दोनों बच्चे फ़ोन में इतना व्यस्त है कि क्या ही बताऊं ऐसा लग रहा है कि मैंने फ़ोन दिला कर अपने बच्चों की जिंदगी ख़राब कर दी है।

फ़ोन : जिंदगी ख़राब

दयाराम कहता है ऐसा नहीं है मित्र तुम्हारे बच्चे भी काफ़ी अच्छे हैं मुझे मालूम है वह समझ जाएंगे तुम्हें कोई गलतफहमी हो रही होगी। मित्र कहता है दयाराम यह फ़ोन हर बच्चे की जिंदगी ख़राब कर सकता है फिर चाहे वह मेरे बच्चे हो या तुम्हारे, और मैं तो वादा कर सकता हूं फिर चाहे कितना भी होशियार बच्चा क्यों ना हो। दयाराम कहता है लेकिन मेरी तीनों बेटियां तो ऐसा कर ही नहीं सकती इसका वादा मैं तुम्हें कर सकता हूं तब मित्र कहता अगर तुम्हें इतना ही लगता है ना तो ठीक है तुम भी अपने तीनों बेटियों को नया फ़ोन दिला दो फिर मुझे बताना कि परिणाम क्या हुआ।

फ़ोन उपहार

दयाराम अपने मित्र की बात मान लेता है और कहता है ठीक है तो मैं आज ही ऐसा करूंगा। दयाराम शाम को घर पहुंचता है और अपनी तीनों बेटियों को फ़ोन उपहार के स्वरुप देता है तीनों बेटियां काफ़ी प्रसन्न होती है कि उनके पिताजी उनके लिए उपहार लाए। जब बेटियां अपने कमरों में चली गई थी तब दयाराम ने यह फ़ोन की कहानी अपनी बीवी को भी बताइए। इतना सब होने के बाद एक महीना बीत जाता है दयाराम अपनी बेटियों को देखता है और अपनी बीवी से कहता है देखा भाग्यवान मैं तो मित्र से कह ही रहा था मेरी बेटियां ऐसा कुछ काम नहीं करेंगी जैसा उसने बोला था।

बेटियों की दिनचर्या

अगले दिन दयाराम अपने मित्र से मिलता है और कहता है देखो मित्र मेरी तीनों बेटियों ने ऐसा कुछ नहीं किया। मित्र कहता है इतनी जल्दी क्या है, अभी तो सिर्फ़ एक महीना बीता है तुम थोड़ा रुक जाओ। दयाराम कहता है ठीक है जैसी तुम्हारी इच्छा मित्र। दयाराम और उसकी बीवी अपनी तीनों बेटियों की दिनचर्या पर नज़र रखने लग गए थे। दयाराम ने देखा उसकी बेटी नीलम अपना सारा स्कूल का कार्य फ़ोन से देखकर  उतार रही थी दयाराम वहां आता है और कहता है कि तुम  नकल क्यों कर रही हो नीलम कहती है पिताजी यह नकल करना थोड़ी है यह तो बस स्कूल वालों ने मेरे प्रिय मित्र पर निबंध लिखने को कहा था , और पिताजी नकल करना तो उसे कहते हैं जो बच्चे परीक्षा के समय करते हैं और जब आपने यह फ़ोन हमको दिया था तो आपने यह भी तो कहा था कि इस फ़ोन का इस्तेमाल तुम्हें जैसे करना तुम वैसे कर सकते हो।

पढ़ाई पर बुरा असर

और मैं तो सिर्फ़ फ़ोन का इस्तेमाल कर रही हूं ना पिताजी इससे मेरा समय कितना बचेगा मैं कुछ और काम भी तो कर सकती हूं। इतना सुनने के बाद दयाराम नीलम के कमरे से निकल जाता है और निशा के कमरे में जाता है वह देखता है निशा चुपचाप बैठी थी दयाराम पूछता है तुम ऐसे क्यों बैठी हूं बेटी निशा कहती है पिताजी आप फ़ोन मेरे से ले लो यह बहुत बड़ी परेशानी है दयाराम कहता है ऐसा क्या हो गया‌, निशा कहती है पिताजी जब भी मैं पढ़ने के लिए बैठती हूं मेरा ध्यान से फ़ोन में जाता है मैं अपने दोस्तों से बातें करने में अपना समय बर्बाद कर देती हूं या फिर  मस्ती मज़ाक की वीडियोस देखती हूं जिससे मेरी पढ़ाई पर काफ़ी बुरा असर हो रहा है मैं चाहाकर भी नहीं पढ़ पा रही हूं इसलिए मेरी आपसे विनती है कि फ़ोन रख लीजिए मैं जितना इस फ़ोन से दूर होगी उतना अपनी पढ़ाई के करीब जा पाऊंगी मुझे इस आविष्कार से काफ़ी परेशानी हो रही है पता नहीं है ऐसा आविष्कार करा ही क्यों दयाराम निशा से बात करने के बाद उससे फ़ोन ले लेता है और अब वह नयन के पास जाता है ।

नयन का फ़ोन

जब  नयन को देखता है उसे ऐसा लगता नहीं है कि नहीं वह परेशान है फिर नयन से पूछता है बेटा तुम्हें यह फ़ोन कैसा लगा तब नयन कहती है पिताजी यह फ़ोन का आविष्कार तो काफ़ी कमाल का है। पिताजी कहते हैं अच्छा मुझे भी बताओ ज़रा कैसे ? नयन कहती है पिताजी मेरे को एक हफ़्ते पहले स्कूल से प्रोजेक्ट मिला था और इस फ़ोन की वज़ह से मुझे मेरे प्रोजेक्ट बनाने के लिए अनेकों तरीके मिले जिसे मैंने एक तरीका चुना और अपनी तरफ़ से भी उसमें नई चीज़ डाली और अपना प्रोजेक्ट बनाया , इस फ़ोन में समुद्र से भी ज्यादा ज्ञान है तुम्हें किसी चीज़ के बारे में पता करना है  फ़ोन तुम्हें बता देगा तुम घर बैठे किसी भी चीज़ के बारे में जान सकते हो कुछ भी मंगवा सकते हो, और जब मैं कहीं पढ़ाई में अटकती हूं तो फ़ोन की मदद से अपने सवाल का हल निकाल लेती हूं फिर उस सवाल को खुद से करने की कोशिश करती हूं, और पिताजी अब तो मैं फ़ोन से खाना बनाना भी सीख रही हूं।

नयन से सीख

यह सब सुनकर पिताजी काफ़ी प्रसन्न होते हैं। और अपनी तीनों बेटियों को अपने पास बुलाते हैं । अपनी बेटियों को अपने मित्र और फ़ोन की पूरी कहानी बताते हैं और वह तीनों बेटियों को एक दूसरे का फ़ोन का अनुभव भी बताते हैं और कहते हैं नीलम निशा तुम दोनों को नयन से सीख लेने की जरूरत है मैं नयन से काफ़ी खुश हूं। निशा कहती है मैं समझ गई पिताजी यह फ़ोन का आविष्कार गलत नहीं है अगर हम सही तरीके से इस्तेमाल करें तो काफ़ी अच्छा आविष्कार है। अभी नीलम कहती है पिताजी मैं भी समझ गई फ़ोन से सिर्फ नए-नए आईडिया निकाल लूंगी और मेहनत खुद से करूंगी । पिताजी कहते हैं अब तुमने सही बात करी और मैं कोई भी फ़ोन में तुमने से वापिस नहीं लूंगा मैं अपनी तीनों बेटियों से यही चाहता हूं कि वह मुझे फ़ोन का सही इस्तेमाल करके दिखाएं जिसे अगली बार मैं अपने मित्र से मिलूंगा तो  कह सकूं कि मेरी बेटियां फ़ोन का सही इस्तेमाल करना अच्छे से जानती हैं। इतना कहने के बाद तीनों बेटियां अपने पिताजी के गले लग जाती है। 

 

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