तुम्हे पहाड़ घुमाते हैं: Hindi Kavita

तुम्हे पहाड़ घुमाते हैं , a Hindi Kavita by Kagaj Kalam takes you to the new type of adventure which is travelling the hills by bus.

Read Here: Gulzar Poetry Hindi lyrics

तुम्हे पहाड़ घुमाते हैं: Hindi Kavita

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अरे एडवेंचर्स के शौकीनों

ट्रैकिंग, राफ्टिंग, बंजी जंपिंग

जैसे महंगे नशे तो खूब किये होंगे तुमने

चलो तुम्हे सस्ते एडवेंचर का नशा कराते हैं

आओ बस से तुम्हे पहाड़ घुमाते हैं।

 

120 की स्पीड से जब बस धूल उड़ाती है,

टूटी- फूटी संकरी सडकों पर

वो उड़ती बस उड़ती जाती है

ऊपर गिरते पत्थर नीचे गहरी खाई है।

तो सोच समझके खोलो आँखें

खिड़की से बाहर खूबसूरती CUM मौत मुस्कुराती है

 

ड्राइवर अपना कुछ नए स्टंट करके दिखाता है

एक हाथ से स्टेरिंग गुटखा दूसरे से फाड़ चबाता है

नशे में मानो मौत के कुएं सा गाडी चलता है।

 

जो टायर देखूं तो दिल धक् सा रहजाता है,

एक पल में सड़क से बाहर दूजे पल अंदर होता है ,

कभी कभी तो “आधी बस का बाहर झूलना “

जैसा नज़ारा दीखता है,

मानो ” FAST & FURIOUS का स्टंट
” फिर से कोई दोहराता है।

 

रिंग आना या पलटी करना

सस्ते एडवेंचर के नशे के कारण होता है,

लत लग जाये तो अगला कदम गाडी की छत पे चढ़

मौत को चुनौती देना होता है।

 

अरे एडवेंचर्स के शौकीनों

ट्रैकिंग, राफ्टिंग, बंजी जंपिंग

जैसे महंगे नशे तो खूब किये होंगे तुमने

चलो तुम्हे सस्ते एडवेंचर का नशा कराते हैं

आओ बस से तुम्हे पहाड़ घुमाते हैं।

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