ये जश्न-ऐ दहशरा है भाई
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जश्न-ऐ दहशरा | A Hindi Poem |

जश्न-ऐ दहशरा is a Hindi poem on an Indian festival Dussehra. A festival of a victory of truth over lies. Lord Ram got win over Ravan and Maa Durga killed Mahisashur this day as per Indian mythology. But we have limited understanding on it. To see it in wider perspective has become essential especially times like these to understand the real meaning of ethics of Lord Ram. While celebrating the victory of Lord Ram, we can’t ignore the greatness of Ravan but at the same time we have to understand the reason of his fall.  Only then it will be right time to wish Happy Dussehra.

 

 Dussehra Status: 

जश्न-ऐ दहशरा

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ये जश्न-ऐ दहशरा है भाई

ये जश्न-ऐ दहशरा है भाई ,

मनाने के लिए बड़ी समझ चाहिए। 

 

कब तक रावण की हार मनाएं, 

कभी तो राम की जीत मनानी चाहिए। 

 

आधा खाली है गिलास कब तक देखें 

कभी आधा भरा है गिलास देखने का नजरिया चाहिए। 

 

ये जश्न-ऐ दहशरा है भाई ,

मनाने के लिए बड़ी समझ चाहिए। 

ये जश्न-ऐ दहशरा है भाई

नफरतों को एक तरफ़ा रखने की

थोड़ी सी समझ चाहिए। 

 

अगर, पत्नी का हरण करने वाले के पास,

शिक्षा हेतु अपने भाई को भेजने वाला राम चाहिए,

तो अपने मृत्यु दाता की इच्छा का सम्मान

करने वाला रावण भी चाहिए। 

 

यूँ ही नहीं,

दहशरा मनाने के लिए भाई बड़ी समझ चाहिए। 

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