गौरैया की सीख | A Hindi Story |

गौरैया की सीख is a Hindi Story on Kagaj Kalam written by Bhumika Joshi. 

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गौरैया की सीख | Hindi Story

एक बार की बात है एक गौरैया चिड़िया अपने परिवार के साथ लखनराम के बगीचे में रहती थी। लखनराम काफ़ी धनवान आदमी था । उसके पास काफ़ी बड़ा बगीचा था जिसमें काफ़ी पेड़ पौधे थे। उसी बगीचे में एक अमरूद के पेड़ पर गौरैया अपने बच्चों के साथ रहती थी। एक बार क्या हुआ ? गौरैया अपने बच्चों को कहानी सुना रही थी तभी वहां लखनराम आता है और अपने आदमियों से कहता है कि यह सारे पेड़ काट दो।

Hindi Poems By Kagaj Kalam

डर: घर नष्ट हो जाएगा

यह बात सुनकर गौरैया के बच्चे डर जाते हैं । कहते हैं मां हमारा घर नष्ट हो जाएगा हम कहां रहेंगे। गौरैया अपने बच्चों को समझाती है और कहती है हमको कुछ नहीं होगा हम अपने लिए नया घर ढूंढ लेंगे। देखते ही देखते लखनराम उस बगीचे के सारे पेड़ कटवा देता है। परंतु लखनराम ने वह पेड़ नहीं कटवाया जिसमें गौरैया का परिवार रहता था। और उसने वह पेड़ इसीलिए नहीं कटवाया क्योंकि उस पेड़ पर काफ़ी  मीठे अमरुद लगते थे। एक समय के लिए गौरैया भी चिंतित हो गई थी कि अगर यह पेड़ कट जाता तो हम कहां जाते , पर वह पेड़ नहीं कटा गौरैया और उसके बच्चे दोनों ही काफ़ी खुश थे।

मीठे अमरूद

अब रात हो चुकी थी गौरैया अपने बच्चों से कहती है कि तुम सब सो जाओ बच्चे कहते हैं मां लखनराम ने मीठे अमरूद की वज़ह से पेड़ नहीं काटा ना गौरैया कहती है हां। बच्चे कहते हैं ऐसा क्यों करा मां उन्होंने मां कहती है अभी तुम सो जाओ मैं तुम्हें बाद में पक्का बताऊंगी। इतना कहने के बाद गौरैया अपने बच्चों को सुला देती है। अगले दिन जैसे ही गौरैया और उसके बच्चे उठते हैं वह देखते हैं उस बगीचे में एक दूसरा घर बनाने की तैयारी चल रही थी। गौरैया के बच्चे कहते हैं मां  लखनराम एक नया घर क्यों बना रहा है ,इनके घर में तो सिर्फ 4 लोग रहते हैं और 4 लोगों के हिसाब से तो इनका पुराना घर ही काफ़ी बड़ा है तो यह नया घर क्यों मां।

गौरैया की सीख और लखनराम एक नया घर

 मां कहती है बेटा वो उनकी ज़मीन है इसीलिए वह अपने लिए दूसरा घर बनवा रहे हैं। गौरैया के बच्चे कहते हैं मां तो हम भी अपने लिए दो-तीन घोंसले बना लेते हैं क्योंकि अमरूद का पेड़ भी तो कितना बड़ा है इसमें कितने सारे घोंसले बन सकते हैं मां। गौरैया कहती है यह तुम क्या कर रहे हो हमारे परिवार के हिसाब से यह घोंसला काफ़ी है हमारे लिए। बच्चे कहते हैं मां तो लखनराम के परिवार के हिसाब से उनका पुराना घर भी तो ठीक है तो वह फिर नया घर क्यों बना रहे हैं इस बगीचे को नष्ट करके।

लखनराम की बेवकूफी

गौरैया कहती है लगता है अब तुम लोग बड़े हो गए हो तुम्हें मनुष्य के बारे में जाने की काफ़ी उत्सुकता है । तो सुनो मेरे बच्चों मनुष्य का यह स्वभाव है तुमने देखा नहीं लखनराम ने बगीचे के सारे पेड़ काट दिए परंतु उसने इस पेड़ को इसीलिए रहने दिया क्योंकि इस पेड़ से उसको मीठे अमरूद मिल रहे थे। अगर उसे इस  पेड़ से भी  अमरुद नहीं मिलते  तो  वह इसे भी काट देता। बच्चों आज का मनुष्य अपने आप को आधुनिक कहता है परंतु लखनराम की बेवकूफी ने यह साबित कर दिया कि आज भी ‌कुछ मुर्ख इस दुनिया में है उसने यह नहीं देखा कि जितने भी पेड़ उसने काटे वह सब  उसे ऑक्सीजन प्रदान कर रहे थे जिस वजह से उसको सांस लेने में दिक्कत नहीं हो रही थी। बच्चे कहते हैं मां मनुष्य आज के समय में सिर्फ अपना फ़ायदा क्यों देखता है।

ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल क्यों

गौरैया कहती है हर मनुष्य अपना फ़ायदा नहीं देखता है कुछ मनुष्य ऐसे भी है जो इस प्रकृति को दूषित होने से रोकते  हैं पर लखनराम जैसे मनुष्यों की वजह से यह लोग दब जाते हैं। और तुम बच्चों ने कहा था कि इस पेड़ पर हम भी दो चार घोंसले और बना दे परंतु जितनी हमको जरूरत है उतना हम पर हैं और उस जगह पर दूसरी चिड़िया अपने घोंसले बना सकती हैं । मनुष्य जाति में गरीब अमीर का भेदभाव होता होगा पर हममें नहीं होता है बच्चों हमको दूसरों के बारे में भी अच्छा सोचना चाहिए ।अगर हमारी जरूरतें पूरी हो रही है ,तो हम अपनी ज़रूरत से ज़्यादा उस चीज़ का इस्तेमाल क्यों करें जिसको उस चीज़ की सही में  ज़रूरत है उसको दो। बच्चे कहते हैं मां इसका मतलब इंसान गंदे होते हैं ना वह अपने इस्तेमाल के लिए प्रकृति को नष्ट करते हैं।

इंसान गलत और नहीं

गौरैया कहती है ऐसा नहीं है हर इंसान गलत नहीं होता बस कुछ लोग गलत सोच में उलझते रहते हैं। उसी रात लखनराम की बीवी कहती है कि आप एक नया घर क्यों बनवा रहे हैं हमको तो नए घर की ज़रूरत ही नहीं है लखनराम कहता है हमारी ज़मीन खाली पड़ी थी तो मैंने सोचा इसमें नया कुछ बनवा दूं। अब जब मैं सड़कों से निकलूंगा ना तब सब कहेगा यह तो वही है ना जिसकी दो ‌-दो हवेलियां है। लखनराम की पत्नी कहती है अगर आप घर बनवाई रहे हो तो इसको किराए पर चढ़ा देना जिससे लोगों का भला तो हो सके लखनराम कहता है क्या तुम पागल हो गई हो।

लखनराम की बीवी

लखनराम की बीवी उसे काफ़ी समझाती है कि हम इंसान हैं हमको इंसानियत दिखानी चाहिेए वह कहती है जिस समय से आज यह गरीब लोग गुज़र रहे हैं जिनके पास छत नहीं है क्या पता आगे आने वाले समय में हमको भी उस समय से ना गुजरना पड़े इसीलिए दूसरों की मदद करने की कोशिश जरूर करें जब तक कर सकते हैं तब तक तो करनी ही चाहिए। लखनराम की बीवी उसको इंसानियत का पाठ पढ़ाने की कोशिश करती है और कहीं ना कहीं वह सफल भी होती है।

समझने की देरी

अब 1 साल बीत जाता है और लखनराम का नया घर भी बन जाता है परंतु लखनराम उसमें नहीं रहता उस घर को  किराए पर चढ़ा देता है। तब गौरैया कहती है देखो बच्चों घर को किराए पर चढ़ाने से लखनराम का भी फ़ायदा है और जिन लोगों के पास छत नहीं है उनको छत मिल गई है। वह कहती है हमको लखनराम की बीवी की जैसे इंसान चाहिए जो कहीं गलत हो रहा है उसे रोक सके सामने वाले को समझा सके तभी तो वह समझेगा जैसे लखनराम समझा और तुमने एक चीज़ पर गौर करा होगा कि लखनराम ने अपने पीछे वाले बगीचे पर काफ़ी पेड़ लगाए हैं। तब गौरैया के बच्चे कहते हैं आपने सही कहा था हमको सिर्फ़ समझने की देरी होती है अगर हम समझ जाते फिर तो अच्छा ही अच्छा होता है और हम अच्छा ही अच्छा करते हैं।

गौरैया की सीख

गौरैया कहती है देखो बच्चों अगर जिंदगी में कभी भी तुम्हें ऐसा लगे कि सामने वाला गलत कर रहा है और उसके कार्य से लोगों पर गलत प्रभाव पड़ेगा तो तुमको उसे रोकना है समझाना है क्योंकि अगर तुम्हें यह गलत सही की समझ है ना तो तुम्हें समझाने में भी आसानी होगी और क्या पता तुम्हारे समझाने से वह सुधर जाए ।

 

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