करुणा एक नई सोच | Hindi Story

करुणा एक नई सोच | Hindi Story narrated by Bhumika Joshi. A beautiful narration compels you to understand the values of life.

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करुणा एक नई सोच | Hindi Story

करुणा की सुबह 4:00 बजे से हो जाती है करुणा एक ग्रहणी है जो सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने परिवार को अपनी पूरी दुनिया मानती है  करुणा का एक बेटा है जिसका नाम अर्जुन है .अर्जुन अपनी मां के हर काम में  मदद करता है, करुणा का पति जादव काफ़ी अच्छा और मेहनती इंसान है ऐसा पति और बेटा पाकर अपने आपको धन्य समझती है पर हर मनुष्य के जीवन में कुछ ऐसा समय आता है जो आपकी आने वाली ज़िंदगी का रुख़ मोड़ देता है और ऐसा ही कुछ करुणा के साथ हुआ।

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जादव और शराब 

पहली बार  जादव घर में शराब पीकर आया था करुणा पूछती है कि आपने शराब क्यों पी रखी  है जादव गुस्से में होता है, और कहता हैं मैंने नौकरी छोड़ दी है करुणा पूछती है क्यों छोड़ दी आपने नौकरी। जादव कहता है यह तुम्हारा काम नहीं है तुम अपने पति से ऐसे सवाल जवाब नहीं पूछ सकती , तुम सिर्फ़ अर्जुन की परवरिश पर ध्यान दो करुणा कहती है आप अभी होश में नहीं इसलिए आप यह सब बोल रहे हैं। जादव कहता है जब मैं होश में नहीं हूं तो इसका मतलब मैं सब सच बोल रहा हूं, करुणा जादव को कमरे में सुला देती है जब अर्जुन को पता चलता है कि उसके पिताजी शराब पीकर आए हैं तो वह कहता है मां पिताजी सही में कष्ट में है आज तक उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया, मां कहती है तुम अभी सो जाओ इसके बारे में मैं कल बात करूंगी तुम्हारे पिताजी से।

सुबह हो गई थी करुणा जादव को उठाने जाती है पर वह देखती है वहां तो जादव है ही नहीं करुणा पूरे घर में देखती है पर जादव ‌कहीं नहीं दिखता अर्जुन आसपास की गलियों में देखकर आता है पर उसे पिताजी नहीं दिखते करुणा को काफ़ी चिंता होती है‌ जादव सुबह-सुबह बिना कुछ बताएं चला गया।

अर्जुन और जादव

अर्जुन कहता है मां तुम चिंता मत करो पिताजी शाम तक घर ज़रूर लौट आयेंगे .रात हो जाती है जादव आज भी शराब पीकर आता है करुणा पूछती है आपको हो क्या गया है ? जादव कहता है मुझे तुम से मतलब नहीं हट जाओ मुझे सोने जाना है ऐसे बोलने पर अर्जुन कहता है आप मेरी मां के सवालों का जवाब बिना दिए नहीं जा सकते, जादव कहता है बड़ों के बीच में बोलने की कोई ज़रूरत नहीं है, करुणा अर्जुन को कमरे में जाने को कहती है और  जादव भी सोने चले जाता है.

ज़िम्मेदारी: करुणा एक नई सोच | Hindi Story

अगले दिन फिर जादव सुबह-सुबह कहीं चले जाता है ऐसे करते करते एक हफ़्ता हो गया जब जादव रात को आया तो करुणा ने कहा घर का राशन ख़त्म होने वाला है तो आप ला देना जादव कहता है मैं क्यों लाऊं मैं तो पूरा दिन घर से बाहर रहता हूं और खाना भी बाहर ही खाता हूं तो मैं क्यों करूं । करुणा कहती है यह तो आपका काम है मैं और अर्जुन आपकी ज़िम्मेदारी है, जादव कहता है कौन सी ज़िम्मेदारी मैं नहीं मानता,‌‌ जादव कहता है आज मैं अपनी सारी जिम्मेदारियों को छोड़कर जा रहा हूं जाते-जाते जादव  कहता‌ हैं कि मैंने नौकरी छोड़ी नहीं है मुझे नौकरी से निकाल दिया गया है और मुझे तुम दोनों के साथ अब इसलिए नहीं रहना क्योंकि मैं किसी और को पसंद करता हूं उसके मां-बाप तुम्हारे मां-बाप जैसे गरीब नहीं है जो दहेज़ के नाम पर फलों की टोकरी पकड़ा दे करुणा की आंखों से आंसू निकल पड़ते हैं करुणा कहती है मुझ पर रहम करो हमको छोड़कर मत जाओ अर्जुन को अभी आपकी ज़रूरत है मैं आपसे विनती करती हूं जादव कहता है तुम दोनों के साथ रहकर क्या मिलेगा मुझे, जिसके साथ में रह रहा हूं वह खुद कमाती है और मेरे को भी खिलाने को तैयार है तो मैं तुम्हारे साथ क्यों रहूं। करुणा जादव को बहुत समझाती है। मेरे लिए नहीं तो अर्जुन के लिए ही सही पर जादव सुनता नहीं और वहां से चले जाता है।

दहेज: करुणा एक नई सोच  

यह पूरी बात कुछ दिनों में पूरे मोहल्ले में फ़ैल जाती है करुणा को लोग ताने मारते हैं कहते  है अगर दहेज ले आती तो शायद आज ऐसा ना होता एक बच्चे से उसके बाप की छाया छीन लीं तूने कुछ औरतें उसे यह तक कहती है कि जा अपने पति से माफ़ी मांग .इन सब चीजों से करुणा‌ परेशान हो चुकी थीं। उसने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था। अर्जुन अपनी मां की यह हालत नहीं देख‌ पा रहा था, अर्जुन अपनी मां को कहता है आप क्यों रो रही हो मुझे सिर्फ़ आप चाहिएं पिताजी की गलती है यह सभी को पता है पर फिर भी दोष आपको दे रहे हैं . अर्जुन कहता है मां अगर आप अपने आप को कमज़ोर समझने लग गई तो मैं भी कमज़ोर पड़ जाऊंगा। यह जो लोग बोल रहे हैं ना अगर आपने इनका जवाब नहीं दिया तो इन सब को लगेगा कि गलती आप ही की है। और मैं नहीं चाहता कि मेरी मां की भी वहीं हालत हो जो और औरतों की हो जाती है जब उनका पति उनका साथ छोड़ देता है ।इतना कहकर अर्जुन अपनी मां के आंचल में सो जाता है अगले दिन करुणा कहती है अर्जुन जो कल तूने मुझे कहा वह सब सही है पर घर चलाने के लिए तेरी पढ़ाई के लिए तेरे पिताजी का होना ज़रूरी है ।अर्जुन कहता है मां अगर आप चाहोगे तो आप भी कर सकती हो बस आप एक बार सोच लो कि आपने अपने बेटे के साथ एक नए जीवन की शुरुआत करनी है कि नहीं। करुणा कहती है करनी है करुणा घर से बाहर निकलने लग जाती है मोहल्ले के लोग फिर से उसे ताना कसते हैं . इस बार करुणा चुप नहीं बैठती मोहल्ले  में सब को कहती है कि मुझे आप सब लोगों से कुछ पूछना है और कुछ बताना भी है मेरे पति ने मेरा साथ छोड़ा , मेरा दोष कैसे? भागा घर से वो, दूसरी औरत के साथ चक्कर रखा उसने और दोषी आप सब मुझे कह रहे हैं ।यह कैसा इंसाफ है? मैंने तो इतनी विनती करी पैरों पर गिरी पर फिर भी उस आदमी को कुछ समझ नहीं आया और अब मुझे उसकी ज़रूरत नहीं है ‌।

मेरी ताकत: 

मेरे साथ मेरा बेटा है मेरी ताकत है, मेरे बारे में आप जो सोचते हो वह आपके ऊपर है पर एक बात मैं आपसे कहना चाहती हूं अगर मेरी जगह कोई आप ही के घर की औरत होती तभी भी क्या आप उसे दोषी कहते हैं नहीं कहते न‌, क्योंकि आपको पता है कि आपके घर की औरत सही है तो आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हों . आप लोगों को जो सोचना है वह आप पर है आप में से कुछ औरतों ने मुझे कहा था कि तू अपने पति से माफी मांग ले वह तुझे अपना लेगा पर मैं किस बात की माफी मांगू मैं तो उस इंसान को भूल चुकी हूं जिस इंसान को हम माफ़ नहीं कर सकते उसको भुला देना चाहिए और जिस इंसान को हम भुला नहीं सकते उसको माफ़ कर देना चाहिए और मैं उस इंसान को कभी माफ़ नहीं कर सकती। मैं अपने बेटे के सा‌थ नयी  ज़िंदगी की शुरुआत करूंगी उसके साथ कोई खिलवाड़ नहीं होगा इतना कहकर करुणा वहां से चली जाती है। करुणा अपना सिलाई सेंटर खोलती है जिससे वह अपने और अपने बेटे का ख़र्चा निकाल सके, अब सारे मोहल्ले वाले भी करुणा को एक साहसी औरत के रूप में देखते हैं और उसका क़दम क़दम पर साथ देते हैं।

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